~200 करोड़ की सिक्यॉरिटी मनी फंसी, भटक रहे स्टूडेंट

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यूपी में नीट की काउंसलिंग में शामिल छात्रों की करीब 200 करोड़ रुपये की सिक्यॉरिटी मनी फंसी हुई है। सरकारी और निजी मेडिकल सीटों के लिए जमा कराई गई यह रकम 45 दिन में लौटाई जानी थी। छात्र और अभिभावक डीजीएमई कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। प्रमुख सचिव अमित घोष ने जल्द रिफंड का आश्वासन दिया है।

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Ranvijay.Singh1

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लखनऊ : यूपी में MBBS और BDS के लिए पिछले साल हुए नैशनल एलिजीबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की काउंसिलिंग में शामिल स्टूडेंट्स अपनी सिक्यॉरिटी मनी वापस पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। जुलाई 2025 में शुरू हुई काउंसिल के तहत स्टूडेंट्स से सरकारी सीट के लिए 30 हजार और निजी कॉलेज के लिए दो लाख रुपये सिक्यॉरिटी मनी के तौर पर जमा करवाए गए थे। नियम के मुताबिक 45 दिन में यह रकम रिफंड की जानी थी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया गया। रिफंड न होने के चलते काउंसलिंग में शामिल करीब 25 हजार स्टूडेंट्स से जमा करवाई गई करीब 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम फंसी हुई है। स्टूडेंट और अभिभावक डीजीएमई कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। प्रमुख सचिव अमित घोष का दावा है कि इसे लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिया गया है और जल्द ही काउंसलिंग में शामिल सभी अभ्यर्थी और स्टूडेंट्स को उनकी सिक्यॉरिटी मनी रिफंड कर दी जाएगी।

यूपी के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 5,725 और निजी संस्थानों में 7,350 एमबीबीएस की सीटें हैं। इनपर दाखिला लेने के लिए पिछले साल 18 जुलाई से 28 जुलाई तक पहले राउंड की काउंसलिंग हुई थी। काउंसलिंग के लिए करीब 25 हजार स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। इसके लिए सरकारी और निजी सीट के लिए 30 हजार से दो लाख रुपये सिक्यॉरिटी मनी जमा करवाई गई। सेंट्रल काउंसलिंग में 45 दिन के भीतर ही सिक्यॉरिटी मनी वापस हो गई, लेकिन यूपी की काउंसलिंग में शामिल स्टूडेंट्स को अब तक पैसा वापस नहीं मिला है। यूपी में दूसरे राउंड की काउंसलिंग 10 सितंबर से 18 सितंबर, तीसर राउंड की काउंसलिंग 15 सितंबर से 16 अक्टूबर और उसके बाद बची हुई सीटों पर नवंबर से दिसंबर के बीच मॉप अप राउंड के तहत दाखिला दिया गया। इसके बावजूद किसी भी राउंड के चयनित या दाखिला न ले सके स्टूडेंट्स को उनकी सिक्यॉरिटी मनी नहीं लौटाई गई। डीजीएमई कार्यालय पहुंचे अभिभावकों को काउंसलिंग खत्म होने के बाद एक साथ सभी को रिफंड का भरोसा दिलाया गया, लेकिन उसके बाद मार्च बीत गया और अप्रैल का महीना भी लगभग खत्म होने को है, लेकिन भुगतान नहीं हुआ।