श्रमिकों के मुद्दों पर दो मजदूर संगठन हुए आमने-सामने

नवभारतटाइम्स.कॉम

गुड़गांव में श्रमिक सम्मान समारोह को लेकर भारतीय मजदूर संघ और सीटू आमने-सामने हैं। सीटू ने वेतन वृद्धि के सरकारी आंकड़ों को भ्रामक बताया है। वहीं बीएमएस ने इसे राष्ट्रहित और मजदूरों की भलाई से जोड़ा है। दोनों संगठनों के बीच न्यूनतम वेतन और श्रमिक आंदोलन को लेकर वैचारिक मतभेद गहरा गए हैं।

श्रमिकों के मुद्दों पर दो मजदूर संगठन हुए आमने-सामने

NBT रिपोर्ट, गुड़गांव

सेक्टर-38 स्थित ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में रविवार को आयोजित श्रमिक सम्मान समारोह को लेकर दो मजदूर संगठनों के बीच टकराव खुलकर सामने आ रहे हैं। एक ओर भारतीय मजदूर संघ (BMS) इस कार्यक्रम को श्रमिक हितों के सम्मान से जोड़कर देख रहा है, वहीं सीटू इसे सरकार की छवि चमकाने की कवायद करार दे रही है। इस समारोह के बहाने न्यूनतम वेतन , श्रमिक आंदोलन और सरकार की नीतियों को लेकर दोनों संगठनों के बीच वैचारिक खाई गहरी होती नजर आ रही है।

सीटू के प्रदेश महासचिव जय भगवान ने सम्मान समारोह पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार द्वारा पेश किया जा रहा वेतन वृद्धि का आंकड़ा भ्रामक है। कई सालों तक वेतन वृद्धि को प्रदेश सरकार ने रोके रखा। अब इसे उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। बीएमएस सरकार के साथ खड़ा नजर आता है। उसका मजदूर हितों से कोई लेना-देना नहीं है। श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी के कारण ही आंदोलन जरूरी हो गया है। एक मई को मजदूरों के हितों को प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा। श्रमिक सम्मान समारोह एक तरह का मजाक है।

वहीं बीएमएस के प्रदेश महामंत्री हवा सिंह ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों संगठनों की विचारधाराएं अलग हैं। बीएमएस का उद्देश्य राष्ट्रहित और मजदूरों की भलाई है, जबकि सीटू मजदूरों को आंदोलनों में उलझाकर और हमेशा सड़क पर रखना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा में न्यूनतम वेतन में वृद्धि एक संतुलित फैसला है, जिसमें सरकार, उद्योग और मजदूर तीनों पक्षों का ध्यान रखा गया है। बीएमएस किसी भी प्रकार की हिंसा या तोड़फोड़ के खिलाफ है और समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिये चाहता है। उन्होंने कहा कि केरल भी हरियाणा की तर्ज पर कौशल रोजगार निगम वाले मॉडल को अपने यहां स्थापित करने के पक्ष में है।