कर्नाटक धार्मिक संस्थान कानून पर फैसला वापस लिया

नवभारतटाइम्स.कॉम

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के धार्मिक संस्थान कानून पर अपना फैसला फिलहाल रोक दिया है। सबरीमाला मामले की सुनवाई का इस पर असर पड़ेगा। अब नौ जजों की संविधान पीठ के फैसले के बाद ही इस मामले पर सुनवाई होगी। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 1997 के इस कानून को असंवैधानिक करार दिया था।

कर्नाटक धार्मिक संस्थान कानून पर फैसला वापस लिया

NBT रिपोर्ट, नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्त अधिनियम, 1997 की वैधता से जुड़े मामले में अपना पहले सुरक्षित रखा गया फैसला वापस ले लिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले पर चल रहे सबरीमाला संदर्भ का सीधा प्रभाव पड़ेगा, इसलिए अब इस पर सुनवाई 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के निर्णय के बाद ही होगी। यह मामला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने था। पीठ ने 11 फरवरी को फैसला सुरक्षित रखा था, लेकिन बाद में यह माना गया कि सबरीमाला संदर्भ में उठे संवैधानिक प्रश्न और इस मामले के प्रश्न काफी हद तक समान हैं। इसी वजह से अदालत ने अपना आरक्षित आदेश वापस लेते हुए कहा कि सभी पक्षों के वकीलों की यह समान राय है कि 9-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा तय किए जाने वाले सिद्धांत इन अपीलों पर सीधे लागू होंगे। विवाद की जड़ कर्नाटक सरकार की वह अपील है जिसमें उसने कर्नाटक हाईकोर्ट के 2006 के फैसले को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने 1997 के अधिनियम को असंवैधानिक ठहराया था। यह कानून राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में लागू पांच पुराने कानूनों को हटाकर एक समान व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से लाया गया था।