इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली में घर के भीतर नमाज़ अदा करने को लेकर दाखिल याचिका को निस्तारित कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि घर में नमाज़ के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटाना उचित नहीं है। सुनवाई के दौरान याची की ओर से कोर्ट को भरोसा दिया गया कि भविष्य में विवादित स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों को नमाज़ के लिए इकट्ठा नहीं किया जाएगा। इस अंडरटेकिंग को रिकॉर्ड में लेते हुए कोर्ट ने याचिका खत्म कर दी।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर याची अपने वादे का उल्लंघन करता है और दोबारा भीड़ जुटती है, जिससे इलाके की शांति और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ता है, तो जिला प्रशासन और पुलिस कानून के तहत सख्त कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे। इस मामले में कोर्ट ने बरेली के डीएम और एसएसपी को जारी अवमानना नोटिस भी रद्द कर दिए। साथ ही, पहले से दर्ज चालान तुरंत वापस लेने के निर्देश दिए गए। सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से बताया गया कि याची अपने घर पर रोजाना 50-60 लोगों को नमाज़ के लिए बुला रहा था, जिससे क्षेत्र की शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी। इस पर कोर्ट ने चिंता जताई। याची की तरफ से यह भी कहा गया कि हसीन खान को दी गई सुरक्षा अब जरूरी नहीं है। इस पर कोर्ट ने पुलिस को सुरक्षा वापस लेने का आदेश दे दिया।


