n NBT रिपोर्ट, नोएडा
सेक्टर-63 में पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर के मामले में जांच में सामने आया है कि ठगी के कॉलसेंटर का मास्टरमाइंड कोई अनपढ़ अपराधी नहीं, बल्कि प्रयागराज का एक बीटेक ग्रेजुएट है। जिसने अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री का इस्तेमाल बेरोजगार युवाओं को क्रूज शिप पर नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर उनकी जेबें खाली करने में किया।
साइबर सेल और सेक्टर-63 पुलिस की संयुक्त जांच में पता चला कि मास्टरमाइंड नितिन कुमार सोरांव निवासी प्रयागराज ने ठगी की शुरुआत मोबाइल से की थी। धीरे-धीरे उसने अपने भाई सचिन के साथ मिलकर इस धंधे को संगठित रूप दिया। आरोपियों ने सबसे पहले नोएडा के सेक्टर-1 में अपना ऑफिस खोला था, जहां छह महीने तक बिना किसी रोक-टोक के ठगी का खेल चलता रहा। जब शिकायतें बढ़ने का डर हुआ, तो शातिरों ने सेक्टर 1 का ऑफिस बंद कर दिया और सेक्टर-63 में आलीशान कॉल सेंटर शुरू कर दिया।
6 लिस्ट में मिले सैकड़ों युवकों के नाम : छापेमारी के दौरान पुलिस को 6 ऐसी वर्क कैंडिडेट कॉलिंग लिस्ट मिली हैं, जिनमें सैकड़ों बेरोजगारों के नाम, मोबाइल नंबर, उनकी योग्यता और शहर का विवरण दर्ज है। आरोपी यह डेटा जॉब पोर्टल्स, सोशल मीडिया और अवैध डेटा बेचने वाली कंपनियों से खरीदते थे। पुलिस अब इन सूचियों और बरामद 11 मोबाइल फोन के जरिए उन 300 से अधिक लोगों से संपर्क कर रही है, जो अब तक इस गिरोह का शिकार बन चुके हैं। एसीपी साइबर सेल ने बताया कि आरोपी बेहद पेशेवर थे। वे जानते थे कि एक जगह ज्यादा समय रहने पर पकड़े जाने का खतरा रहता है, इसलिए वे अप्रैल के पहले सप्ताह में ही सेक्टर-63 का ऑफिस बंद कर किसी नए शहर में शिफ्ट होने की योजना बना चुके थे। फिलहाल मास्टरमाइंड और उसके साथियों से पूछताछ जारी है, ताकि सिंडिकेट के अन्य प्यादों और डेटा बेचने वाली कंपनियों पर नकेल कसी जा सके।


