-- वन विभाग ने आनंदवन की तरफ जाने वाले कच्चे रास्ते को 3 मार्च को खोद दिया था
- अनंगपुर रकबे के अंतर्गत आने वाले आनंदवन के अंदर बने हुए हैं दर्जनों फार्म हाउस और मैरिज गार्डन
- लेकिन अब इन रास्तों पर मिट्टी डाल कर फिर से समतल बना चालू कर दिया गया है
- भूमाफिया व फार्म हाउस संचालक इन रास्तों का करते हैं इस्तेमाल
NBT रिपोर्ट, फरीदाबाद
अरावली की वादियों के संरक्षण के दावों को धता बताते हुए भूमाफिया एक बार फिर सक्रिय हो गया है। ताजा मामला अनंगपुर रकबे के अंतर्गत आने वाले 'आनंदवन' का है, जहां वन विभाग द्वारा अवैध कब्जों को रोकने के लिए खोदे गए रास्तों को दोबारा भरकर चालू कर दिया गया है। विभाग की कार्रवाई को चुनौती देते हुए फार्म हाउस संचालकों और भूमाफियाओं ने इन रास्तों पर मिट्टी डालकर इन्हें आवाजाही के लायक बना लिया है। सूत्रों की मानें तो जंगल के अंदर कई फार्म हाउस को फिर से तैयार किया जा रहा है। हालांकि डीएफओ ने खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करने की बात कही है।
कार्रवाई के एक महीने के भीतर फिर अतिक्रमण
अनंगपुर में रहने वाले शिकायतकर्ता श्याम ने बताया कि वन विभाग ने बीते 3 मार्च को आनंदवन की ओर जाने वाले कच्चे रास्तों को जेसीबी से गहरा खोद दिया था ताकि वाहनों की आवाजाही रोकी जा सके। इस कदम का मुख्य उद्देश्य जंगल के अंदर बने अवैध फार्म हाउसों और मैरिज गार्डनों तक पहुंच को काटना था। लेकिन, विभाग की सख्ती पर लापरवाही भारी पड़ रही है। विभागीय कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद भूमाफिया ने रातों-रात इन गड्ढों को मिट्टी और मलबे से भरकर समतल कर दिया। अब इन रास्तों का इस्तेमाल बेखौफ तरीके से लग्जरी गाड़ियों और निर्माण सामग्री ले जाने के लिए किया जा रहा है।
वन्य जीवों के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा
अरावली का यह क्षेत्र पंजाब भूसंरक्षण अधिनियम (PLPA) 1900 की धारा 4 और 5 के तहत संरक्षित है। कानूनन यहां किसी भी प्रकार की गैर-वानिकी गतिविधि, निर्माण या रास्तों का निर्माण प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, आनंदवन के अंदर दर्जनों फार्म हाउस और मैरिज गार्डन फल-फूल रहे हैं। पिछले साल वन विभाग ने यहां एक बड़ा तोड़फोड़ अभियान चलाया था, जिसमें कई फार्म हाउसों को मलबे में तब्दील कर दिया गया था। लेकिन समय बीतने के साथ यहां फिर से निर्माण और कब्जे की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो सीधे तौर पर पारिस्थितिक तंत्र और वन्य जीवों को नुकसान पहुंचा रही है।
ग्रामीणों के विवाद की आड़ में खेल
क्षेत्र में चर्चा है कि रास्तों को फिर से खोलने के पीछे स्थानीय रसूखदारों और भू-माफिया का हाथ है, जो इसे "गांव का रास्ता" बताकर अपनी गतिविधियों को वैध ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। रास्तों के समतल होने से न केवल अवैध निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि जंगल के अंदर होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों से शांत जोन में शोर-शराबा भी बढ़ गया है।
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इस मामले की सूचना मुझे मिली है। दरअसल, यहां कुछ ग्रामीणों के बीच आपसी विवाद की स्थिति है। कोई पक्ष रास्ता खोदने की बात करता है, तो बाद में गांव के ही लोग इसे गांव का साझा रास्ता बताकर विरोध करते हैं। हालांकि, हमने रास्ता इसलिए खोदा था ताकि अरावली के संरक्षित क्षेत्र में कोई प्रवेश न कर सके। मैं स्वयं मौके पर जाकर इसका निरीक्षण करूंगा और नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-झलकार उयके, डीएफओ, फरीदाबाद


