ज़मीन देने पर सात गांवों के किसानों ने दी सहमति

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बोड़ाकी रेलवे स्टेशन के विस्तार के लिए जमीन का मसला सुलझ गया है। सात गांवों के किसान 137 एकड़ जमीन देने को राजी हो गए हैं। करीब 1800 परिवारों को शिव नाडर यूनिवर्सिटी के पीछे बसाया जाएगा। यह जमीन दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब का हिस्सा बनेगी। इससे दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर दबाव कम होगा।

bodaki railway station expansion farmers of seven villages agree to give land 1800 families to be shifted

n NBT रिपोर्ट, ग्रेनो

बोड़ाकी रेलवे स्टेशन के विस्तार में अड़चन बन रही जमीन का मसला सुलझ गया है। स्टेशन पर बनने वाले 13 प्लैटफॉर्म के लिए 137 एकड़ जमीन ली जाएगी। इस जमीन के करीब 50 फीसदी हिस्से पर लोगों के घर बने हुए हैं। इसके लिए सात गांवों के करीब 1800 परिवार शिफ्ट किए जाएंगे। इस शिफ्टिंग के लिए किसान मान गए हैं। इन्हें शिव नाडर यूनिवर्सिटी के पीछे बसाया जाएगा। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत बोड़ाकी के पास मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब (एमएमटीएच) विकसित किया जाना है। इसमें रेल, मेट्रो, आईएसबीटी आदि सुविधाएं शामिल हैं। इस प्रॉजेक्ट के तहत बोड़ाकी रेलवे स्टेशन का विस्तार किया जाना है। दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर ज्यादा दबाव है, इसलिए इसे विकल्प के रूप में तैयार किया जाएगा। ये 13 प्लैटफॉर्म बोड़ाकी से खुर्जा की तरफ बनाए जाएंगे। इसके लिए करीब 137 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। स्टेशन और यार्ड का एरिया करीब 267 एकड़ हो जाएगा। यह जमीन चमरावली, बोड़ाकी, दादरी, तिलपता, करनवास, पाली, पल्ला व चमरावली रामगढ़ गांव की है। यह जमीन नहीं मिल पा रही थी। इस समस्या को सुलझाने के लिए ग्रेनो अथॉरिटी, जिला प्रशासन ने किसानों के साथ वार्ता की। जन प्रतिनिधियों ने भी सहयोग किया। अब जाकर किसान जमीन खाली करने के लिए राजी हुए हैं। किसानों की जितनी जमीन पर घर बना है, उतनी जमीन उन्हें दी जाएगी। अथॉरिटी शिव नाडर यूनिवर्सिटी के पीछे किसानों को प्लॉट देगी। इस एरिया को अथॉरिटी 105 मीटर रोड से जोड़ेगी ताकि कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। अधिकारियों का कहना है कि किसान इस पर राजी हो गए हैं। अब जल्द जमीन पर कब्जा लिया जाएगा।

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