शक्ति का केंद्र बनी CM की रैली, मंच पर दिखी अंदरूनी सियासत

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फरीदाबाद में मुख्यमंत्री की रैली ने विकास के साथ-साथ भाजपा की अंदरूनी सियासत को भी उजागर किया। मंच पर दो गुटों ने अपनी ताकत दिखाई। मुख्यमंत्री ने एकजुटता का संदेश दिया, लेकिन नेताओं की मौजूदगी और बैठने की व्यवस्था ने खेमेबंदी को स्पष्ट कर दिया। यह रैली फरीदाबाद की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करती नजर आई।

शक्ति का केंद्र बनी CM की रैली, मंच पर दिखी अंदरूनी सियासत

Chanderkant.Yadav @timesofindia.com

n फरीदाबाद : सेक्टर-12 स्थित हुडा ग्राउंड में आयोजित ‘विकसित फरीदाबाद धन्यवाद रैली’ महज विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और घोषणाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने हरियाणा, खासकर फरीदाबाद की भविष्य की राजनीति की दिशा का भी साफ संकेत दे दिया। नाम भले ही फरीदाबाद विधानसभा क्षेत्र की रैली का था, लेकिन आयोजन का स्वरूप और मंच पर मौजूद नेताओं की भीड़ ने इसे विशाल जनसभा में बदल दिया। इस रैली के संयोजक कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल थे, लेकिन कार्यक्रम में जिले और लोकसभा क्षेत्र के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इसके राजनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया।

मंच पर 'दो धड़ों' का शक्ति प्रदर्शन : राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस रैली ने भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और 'कोल्ड वार' की चर्चाओं को एक बार फिर हवा दी है। मंच पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में भाजपा के दो स्पष्ट गुट अपनी-अपनी ताकत दिखाते नजर आए। एक तरफ रैली के मुख्य सूत्रधार और कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के साथ राज्यमंत्री राजेश नागर और कैबिनेट मंत्री गौरव गौतम की जुगलबंदी दिखी। वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के साथ विधायक धनेश अदलखा, सतीश फागना और पूर्व कैबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा का गुट अलग खेमे में बैठा नजर आया। हालांकि सभी नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर एकजुटता का संदेश देने की भरपूर कोशिश की, लेकिन मंच पर बैठने की व्यवस्था और परस्पर संवाद की कमी राजनीतिक पंडितों की नजरों से नहीं बच सकी।

विधानसभा की रैली बनी 'मिनी लोकसभा' का मंच

यूं तो यह कार्यक्रम फरीदाबाद विधानसभा के लिए केंद्रित होना चाहिए था, लेकिन इसमें फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र के तमाम पूर्व विधायक, मंत्री, जिला अध्यक्ष और दिग्गज नेताओं ने शिरकत की। इसे विपुल गोयल की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री से एंटरटेनमेंट सिटी जैसी बड़ी और भविष्य की घोषणा करवाकर विपुल गोयल ने न केवल अपनी राजनीतिक धमक दिखाई है, बल्कि यह भी संदेश दे दिया है कि फरीदाबाद के विकास का खाका खींचने में उनकी भूमिका आने वाले समय में निर्णायक रहने वाली है।

बातों ही बातों में 'श्रेय' की जंग : रैली के दौरान भाषणों के दौर में भी एक दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। मंच पर मौजूद दोनों ही गुटों के नेताओं ने अपनी-अपनी उपलब्धियां गिनवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कृष्णपाल गुर्जर के समर्थकों ने जहां केंद्र सरकार के बड़े प्रॉजेक्ट्स का हवाला दिया, वहीं विपुल गोयल और उनके साथ मौजूद युवा मंत्रियों ने स्थानीय विकास और फरीदाबाद को वैश्विक पहचान दिलाने के विजन को मजबूती से रखा।

एकजुटता का संदेश या वर्चस्व की लड़ाई?

विकसित फरीदाबाद रैली ने यह तो सिद्ध कर दिया कि फरीदाबाद भाजपा का अभेद्य किला है, लेकिन साथ ही यह भी उजागर कर दिया कि पार्टी के भीतर वर्चस्व की जंग अभी थमी नहीं है। मंच पर मुख्यमंत्री ने भले ही सभी को एक सूत्र में बांधने की कोशिश की हो, लेकिन नेताओं की बॉडी लैंग्वेज और खेमेबंदी ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य की राजनीति में 'अपनों' के बीच ही कड़ी प्रतिस्पर्धा होने वाली है।