यमुना में जाने वाले ड्रेन के पानी के 15 जगहों से लिए सैंपल

नवभारतटाइम्स.कॉम

गुड़गांव के ड्रेनों से यमुना में जा रहे प्रदूषण को रोकने के लिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निगरानी बढ़ाई है। लेग-3 में अब 15 जगहों से पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं। इससे प्रदूषण के स्रोत का पता लगाया जाएगा। बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का स्तर 100 से अधिक पाया गया है, जो गंभीर प्रदूषण का संकेत है।

pollution identification in yamuna hspcb increases monitoring by taking samples from 15 drain locations

n NBT न्यूज, गुड़गांव

शहर के ड्रेनों से यमुना में पहुंच रहे प्रदूषण की पहचान के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने निगरानी तेज कर दी है। यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए चल रहे एक्शन प्लान में सुधार के निर्देश मिलने के बाद विभाग की टीमें सक्रिय हो गई हैं। 27 मार्च को हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव ने सभी विभागों की बैठक कर प्लानिंग की जगह रिजल्ट देने का निर्देश दिया था। जिसके बाद से ही विभाग ने मॉनिटरिंग दायरा बढ़ाते हुए खासतौर पर लेग-3 पर सैंपलिंग पॉइंट्स में बड़ा इजाफा किया गया है। पहले जहां इस हिस्से में सिर्फ 6 स्थानों पर ड्रेन के पानी की जांच हो रही थी, अब वहां 9 नए पॉइंट जोड़ दिए गए हैं। इसके बाद अब केवल लेग-3 में ही कुल 15 जगहों पर ड्रेन का सैंपल लिया जा रहा हैं, जिससे प्रदूषण के स्रोत को उसी स्थान पर चिन्हित किया जा सके।

जानकारी के अनुसार, HSPCB पहले भी इन ड्रेनों की मॉनिटरिंग महीनेवार करता रहा है लेकिन अब इसमें तेजी लाई गई है। पानी की जांच में बायोकेमिकल ऑक्सिजन डिमांड (BOD) का स्तर जहां 3 mg/l से कम होना चाहिए। वहीं वर्तमान में यह 100 से अधिक पाया जा रहा है, जो गंभीर प्रदूषण की ओर इशारा करता है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी हो गया है कि आखिर किन स्रोतों से यह प्रदूषण ड्रेनों में पहुंच रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए लेग-1 और लेग-2 पर भी मॉनिटरिंग बढ़ा दी गई है। साउथ जोन के रीजनल ऑफिसर सिद्धार्थ भार्गव ने बताया कि विभाग पहले भी नियमित रूप से मॉनिटरिंग करता था लेकिन ऊपर से मिले निर्देशों के बाद अतिरिक्त पॉइंट्स जोड़े गए हैं। इससे यह पहचानने में मदद मिलेगी कि किस स्थान पर प्रदूषण अधिक है और उसके पीछे क्या कारण हैं। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जो भी रिपोर्ट सामने आएगी, उसे संबंधित नोडल अधिकारी को भेजा जाएगा जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

शहर के ड्रेन को तीन हिस्सों में बांटा गया : गुड़गांव के ड्रेनेज सिस्टम को तीन हिस्सों लेग-1, लेग-2 और लेग-3 में बांटकर मॉनिटर किया जा रहा है। लेग-1 में रिहायशी इलाकों और सेक्टरों से निकलने वाला घरेलू सीवेज शामिल होता है, जबकि लेग-2 में यह पानी इंडस्ट्रियल और कमर्शल एरिया से गुजरते हुए और अधिक प्रदूषित हो जाता है। लेग-3 सबसे अहम और अंतिम हिस्सा है, जहां दोनों लेग का पानी एकत्र होकर नजफगढ़ से यमुना नदी में गिरता है। इसी कारण प्रदूषण के असली स्रोत की पहचान के लिए सबसे ज्यादा फोकस लेग-3 पर किया जा रहा है।

लेग-3 यहां से गुजरता है : गुड़गांव में लेग-3 ड्रेनेज सिस्टम का सबसे अहम और अंतिम हिस्सा माना जाता है, जो घाटा क्षेत्र से निकलकर वाटिका चौक, हीरो होंडा चौक और न्यू गुड़गांव बेल्ट यानी साउथ और सेंट्रल हिस्सों से गुजरते हुए अलग-अलग छोटे-बड़े ड्रेनों के पानी को समेटते हुए नजफगढ़ ड्रेन में जाकर मिलता है। जहां से यह प्रवाह आगे यमुना नदी में पहुंचता है। इसी वजह से इस पूरे कॉरिडोर को प्रदूषण की दृष्टि से सबसे संवेदनशील माना जाता है।