n NBT न्यूज, लखनऊ : उत्तर प्रदेश में सिजेरियन डिलिवरी (ऑपरेशन से प्रसव) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्तमान में प्रदेश में 40 से 50 प्रतिशत डिलिवरी सिजेरियन के माध्यम से हो रही हैं, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के अनुसार यह दर 15 से 20 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए। बाकी 80 से 85 प्रतिशत डिलिवरी सामान्य (नॉर्मल) होनी चाहिए।
ये बातें बातें केजीएमयू के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में ऑब्स ऐंड गाइनी सोसायटी द्वारा आयोजित सम्मेलन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता देव और डॉ सीमा मल्होत्रा ने कहीं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में आने वाली कई महिलाएं खुद सिजेरियन डिलिवरी की मांग करती हैं, जबकि चिकित्सकीय रूप से इसकी आवश्यकता नहीं होती। डॉ. सुजाता देव ने कहा कि कुछ गर्भवती महिलाएं हाई-रिस्क श्रेणी में आती हैं, जिनमें सिजेरियन डिलिवरी जरूरी होती है। लेकिन, जिन महिलाओं की सामान्य डिलिवरी संभव होती है, वे भी ऑपरेशन का विकल्प चुन रही हैं, जो चिंताजनक है।
मुहूर्त पर डिलिवरी का बढ़ रहा ट्रेंड: डॉ. सीमा मल्होत्रा ने बताया कि हाल के वर्षों में “मुहूर्त” पर डिलिवरी कराने का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग नववर्ष, दीपावली जैसे विशेष अवसरों या ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर तय समय पर सिजेरियन डिलिवरी कराना चाहते हैं। कई परिवार पंडित से शुभ समय निकलवाकर अस्पताल पहुंचते हैं और उसी समय ऑपरेशन की मांग करते हैं। डॉ. सीमा मल्होत्रा के अनुसार सिजेरियन डिलिवरी सामान्य प्रसव की तुलना में अधिक जोखिम भरी होती है। इससे महिलाओं में कमजोरी, संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और भविष्य में सामान्य प्रसव की संभावना कम हो जाती है। कई मामलों में बार-बार सिजेरियन होने से Placenta Accreta जैसी गंभीर स्थिति का खतरा बढ़ जाता है। महाराष्ट्र से आईं प्रो. पूनम वर्माशिवकुमार ने बताया कि सिजेरियन की दर कम करने के लिए अब ‘वॉटर बर्थ’ (पानी में प्रसव) का विकल्प भी दिया जा रहा है। इसमें गर्म पानी के टब में प्रसव कराया जाता है।


