n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर जारी विवाद अब संसद के दरवाजे तक पहुंच गया है। प्रदेश में पहली बार यह मामला लोकसभा की याचिका समिति में दाखिल हुआ है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने समिति में याचिका प्रस्तुत कर पावर कारपोरेशन और बिजली वितरण कंपनियों पर विद्युत अधिनियम, 2003 के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि परिषद ने यह याचिका लोकसभा की याचिका समिति के अध्यक्ष एवं सांसद चंद्र प्रकाश जोशी के कार्यालय को सौंप दी है। परिषद का कहना है कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) के तहत प्रीपेड मीटर केवल उपभोक्ता की सहमति से और वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लगाए जा सकते हैं। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत लगभग 3.8 करोड़ उपभोक्ताओं के मीटर बदले जा रहे हैं। इनमें से करीब 70 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बिना सहमति प्रीपेड मोड में कर दिए गए हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य में नए बिजली कनेक्शन अनिवार्य रूप से प्रीपेड मोड में दिए जा रहे हैं, जो कानून के प्रावधानों के विपरीत है।



