अपनी सांसों से जुड़कर जीवन में बनाएं संतुलन

Contributed byआर.डी. अग्रवाल 'प्रेमी'|नवभारतटाइम्स.कॉम

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और चिंता आम है। ऐसे में अपनी सांसों से जुड़ना मन को शांत करने का सबसे आसान तरीका है। गहरी सांस लेने से बेचैनी कम होती है और भीतर स्थिरता आती है। यह अभ्यास किसी भी समय तनाव से राहत दिला सकता है।

अपनी सांसों से जुड़कर जीवन में बनाएं संतुलन

आज चारों ओर तेजी, तनाव और अनिश्चितता का माहौल है। कभी वैश्विक संघर्ष की खबरें, कभी आर्थिक दबाव, तो कभी सोशल मीडिया पर लगातार आती नकारात्मक सूचनाएं, इन सबने हमारे मन को अस्थिर बना दिया है। ऐसे दौर में चिंता करना स्वाभाविक है, लेकिन सच यह है कि चिंता किसी समस्या का समाधान नहीं देती, बल्कि हमारे सोचने और निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर कर देती है। चिंता से मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।

जब हम हर घटना पर प्रतिक्रिया देने लगते हैं - कौन सही है, कौन गलत, तो अपने भीतर की शांति खो बैठते हैं। यह उधेड़बुन हमें मानसिक रूप से थका देती है, जबकि जरूरत हर परिस्थिति में विवेक बनाए रखने की है। समस्या से भागने के बजाय उसका शांत मन से सामना करना ही समाधान की दिशा में पहला कदम है। ऐसे समय में खुद से जुड़ना सबसे जरूरी हो जाता है। दिनभर की भागदौड़ और शोर-शराबे के बीच कुछ पल अपने लिए निकालना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। इसके लिए सबसे सरल उपाय है- सांसों के साथ जुड़ना। गहरी सांस लेने की प्रक्रिया (डीप ब्रीदिंग) मन को तुरंत शांत करने का प्रभावी तरीका है। आराम से बैठकर धीरे-धीरे पांच तक गिनते हुए सांस लें, फिर कुछ क्षण रोकें और धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। इस अभ्यास को कुछ बार दोहराने से मन की बेचैनी कम होती है और भीतर स्थिरता आती है। जब भी तनाव या घबराहट महसूस हो, यह छोटा-सा अभ्यास बड़ा सहारा बन सकता है। इसके साथ ही, सुबह की सैर, हल्का व्यायाम और संतुलित आहार भी हमारे मानसिक और शारीरिक संतुलन को बनाए रखते हैं।

बाहरी परिस्थितियां हमारे नियंत्रण में नहीं हैं, पर अपने मन को संतुलित रखना पूरी तरह हमारे हाथ में है। सांसों के साथ जुड़ना खुद से और उस परम शक्ति से जुड़ना है, जिसने हमें जीवन दिया। जब हम इस सरल विधि को अपनाते हैं, तो पाते हैं कि शांति कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही मौजूद है। बस उसे महसूस करने की जरूरत है।