मतभेद दूर किए जाएं

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संसद के विशेष सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण पर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद उभरे हैं। दक्षिण के राज्य परिसीमन पर चिंता जता रहे हैं। प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण पर समर्थन मांगा है। विपक्ष इसे लागू करने के तरीके पर सवाल उठा रहा है। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर जल्द सहमति बनने की उम्मीद है।

parliamentary disagreements politics heats up over delimitation and womens reservation

संसद के विशेष सत्र के पहले ही दिन सरकार और विपक्ष के बीच जो तनाव देखने को मिला, उसके संकेत पहले ही मिल गए थे। परिसीमन को लेकर दक्षिण के राज्य केंद्र पर भरोसा नहीं कर पा रहे और इस पर उन्हें विपक्षी दलों का भी साथ मिल रहा है। हालांकि पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में यह भरोसा दिलाया कि किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मामले में बड़ी खाई बनी हुई है।

परिसीमन पर चिंता । पीएम ने महिला आरक्षण को राजनीतिक तराजू पर नहीं तौलने की अपील की है। उन्होंने महिलाओं की नेतृत्व क्षमता का जिक्र करते हुए चेताया कि जो इस परिवर्तन का विरोध करेंगे, उन्हें भविष्य में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। हालांकि विपक्ष का विरोध महिला आरक्षण नहीं, इसे लागू करने के तरीके और परिसीमन को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण के बहाने अपने राजनीतिक हित साधना चाहती है। सवाल विशेष सत्र की टाइमिंग को लेकर है, क्योंकि अभी तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में वोटिंग होनी है।

विरोध की वजह । परिसीमन और महिला आरक्षण दो अलग मुद्दे हैं, जिनको अलग-अलग ही देखे जाने की जरूरत है। संसद में सीटें 1971 से नहीं बढ़ीं और वजह दक्षिण के राज्यों की वही फिक्र है, जिसके बारे में अभी चर्चा चल रही। वहीं महिला आरक्षण का मसला पिछले तीन दशकों से अटका हुआ है। 1996 में पहली बार एचडी देवगौड़ा सरकार में महिला आरक्षण बिल लाया गया था, जो पास नहीं हो सका। उसके बार तीन और प्रयास विफल रहे।

पहले ही देर हुई । संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व महिलाओं का अधिकार है, जो उन्हें बहुत पहले मिल जाना चाहिए था। आज तमाम क्षेत्रों में महिलाओं की बराबर भागीदारी दिखती है, सिवाय राजनीति के, जहां उन्हें वोट बैंक तक सीमित करके रखा गया है। लोकसभा में महज 14% महिला सांसदों का आंकड़ा किसी लिहाज से आधी आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं करता। जब सदन में महिलाएं ज्यादा होंगी, तो उम्मीद कर सकते हैं कि उनके मुद्दों को बहस और नीतियों में ज्यादा जगह मिलेगी।

बहस से रास्ता । सरकार महिला आरक्षण बिल पर सभी का समर्थन चाहती है। हालांकि इसके लिए विपक्षी दलों की चिंताओं को भी समझना होगा। इतने महत्वपूर्ण बदलाव में अगर सभी साथ दें, तो इससे अच्छा संदेश जाएगा। अच्छी बात है कि सदन में पहले दिन बहस हुई और असहमतियों को सुना गया। उम्मीद कर सकते हैं कि इससे ही कोई रास्ता निकलेगा। लेकिन यह काम अब जल्द पूरा हो जाना चाहिए। इस पर राजनीति नहीं, देश का भविष्य टिका है।