n NBT रिपोर्ट, फरीदाबाद
साइबर अपराधियों के नए और खतरनाक हथकंडे डिजिटल अरेस्ट का एक बड़ा मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को पुलिस, एटीएस और एनआईए अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग महिला को 24 घंटे तक वर्चुअल निगरानी में रखा और गिरफ्तारी का डर दिखाकर करीब 24.02 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने पीड़िता की एफडी तुड़वाकर पैसे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करवाए। इसके बाद अपना बैंक अकाउंट नंबर देकर पैसाें की जांच के नाम पर रुपए ट्रांसफर करा लिए। पीड़िता शहर के पॉश सेक्टर-21D में रहती हैं और एक बड़े धार्मिक संस्था से जुड़ी हुई हैं। कुछ साल पहले इनके पति की मौत हो चुकी है। पति सरकारी सेवा में कायर्रत थे। महिला की शिकायत पर थाना एनआईटी पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।
ऐसे रची पूरी साजिश: पीड़िता को 24 मार्च को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को पंचकूला का पुलिस इंस्पेक्टर प्रेम कुमार गौतम बताते हुए दावा किया कि उनके नाम से एक बैंक खाता आतंकवादी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ है, जिसमें 7 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। ठगों ने यह भी कहा कि मामला हाईकोर्ट के आदेश पर एटीएस जांच के अधीन है और सहयोग न करने पर तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है। इसके बाद इंस्पेक्टर प्रेम कुमार गौतम ने कहा कि जिस आतंकवादी को पकड़ा है, उसके पास से आपके नाम से HDFC अकाउंट मिला हैं और उसमें हुए लेनदेन में से वो आतंकवादी आपको 10% कमीशन देता था। पीड़िता ने बताया कि आरोपियों ने जांच के नाम पर उनकी पूरी संपत्ति, बैंक खातों, एफडी, गोल्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जानकारी ली। उन्हें विश्वास दिलाया गया कि यदि वे निर्दोष साबित होती हैं तो उनकी राशि वापस कर दी जाएगी। इसी बहाने उनसे एलआईसी पॉलिसी तुड़वाकर रकम अपने खाते में ट्रांसफर करवा ली।

