बाघों के लिए बेहतर ठिकाना बन सकता है सोहगीबरवा जंगल

Contributed byDeep.Singh|नवभारतटाइम्स.कॉम
sohagibarwa forest becomes new abode for tigers hopes rise with better habitat
n NBT रिपोर्ट, लखनऊ

महाराजगंज का सोहगीबरवा जंगल बाघों का बेहतर ठिकाना बन सकता है। यहां की आबोहवा बाघों को भा रही है। यहां एक साल से भी ज्यादा समय पहले छोड़े गए चारों बाघ सुरक्षित हैं और चहलकदमी कर रहे हैं। अब यहां बाघों के लिए और बेहतर हैबिटेट (प्राकृत वास) तैयार किया जा रहा है।
बेहतर प्राकृत वास : महाराजगंज जिले में सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग 48,820 हेक्टेअर क्षेत्रफल में फैला है। यहां मुख्यतौर पर बेंत का जंगल है। साथ ही ग्रासलैंड भी हैं। वहां से होकर नारायणी नदी भी बहती है। यह बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और नेपाल के चितवन टाइगर रिजर्व से जुड़ता है। फिलहाल यह नीलगाय, हिरन, जंगली सुअर, खरगोश, भैंस और अन्य छोटे वन्य जीवों का ठिकाना है।

कैमरे में ट्रैप हुए बाघ : बाघों के प्रवास की संभावनाएं तलाशने के लिए अप्रैल 2025 में यहां खीरी से लाई गई एक बाघिन और एक शावक को यहां छोड़ा गया था। कुछ दिन बाद ही एक शावक और छोड़ा गया था। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की अनुमति से यह बाघ यहां छोड़े गए। साथ ही बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से भी एक बाघ को लाकर यहां छोड़ा गया था। ये सभी बाघ यहां सुरक्षित हैं और शिकार कर रहे हैं। हाल ही में भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने बाघ गणना के दौरान इसकी पुष्टि की है। ये सभी बाघ कैमरों में ट्रैप किए गए हैं। जानकारों का कहना है कि यहां उनको भोजन के लिए छोटे वन्यजीव उपलब्ध हैं। वहीं, पीने का पानी भी उपलब्ध है।