The Unique Laughing Style Of The Inauguration Hero Why Does The Eccentric Laugh At The Politicians Ribbon Cutting
हंसोड़ उद् घाटनवीर
नवभारतटाइम्स.कॉम•
एक सिरफिरा है। वैसे तो सामान्य रहता है, पर कहीं उद्घाटन का फीता लगा देख ले तो काटकर भाग जाता है, लोकार्पण के पर्दे फाड़ देता है, उद्घाटन के लिए तैयार पुल पर पहले ही सेल्फी ले उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर देता है। इसके लिए कई बार जेल भी जा चुका है, पर बड़ा अपराध न होने के कारण जल्द छूट जाता है।
लोगों का कहना है वह पहले राजनीति में था। एक पार्टी में अदना-सा कार्यकर्ता, बहुत मेहनती। विधायकी लड़ने की नौबत आई तो मंत्री के भाई ने उसका टिकट मार लिया। गुस्सा होकर उसने पार्टी छोड़ दी। कुछ दिन गुमसुम रहा, फिर वापसी की। सफेद लकदक कुर्ता-पायजामा, स्पोर्ट्स शू, गले में गमछा और आंखों में उद् घाटन करने की ‘हवस’। मोहल्ले वालों को उसकी हरकतों पर हंसी आती। कहीं स्टेज सजे, माइक आए उन्हें उद् घाटनवीर की याद आने लगती। उसकी इस हरकत से नेताजी बड़े परेशान थे, लेकिन सिरफिरे को कहते भी क्या? बात जब बढ़ने लगी तो नेताजी ने अपने चमचों से कह कर उसे गायब करवा दिया। उद् घाटन और लोकार्पण की कमान फिर नेताजी के हाथ आ गई।एक रोज नेताजी किसी उद् घाटन समारोह में थे। वहां उद् घाटनवीर अचानक से सामने आ गया और ठहाके लगाने लगा। नेताजी को गुस्सा तो बहुत आया, पर वह मंच पर थे। मंच की अपनी मर्यादा होती है, जिसका सम्मान करते हुए नेताजी ने पूछा, 'क्यों हंस रहे हो?' जवाब में उद् घाटनवीर और जोर से हंसने लगा। वहां मौजूद पुलिस वालों ने उसे पकड़ लिया और अगले दिन कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने पूछा, 'क्या इल्जाम है?' 'यह नेताजी के कार्यक्रम में बिना बात के हंस रहा था।' कोर्ट ने कहा, 'यह तो अपराध नहीं। हां, बिना बात के हंस रहा है तो इसे दिमाग के डॉक्टर को दिखाया जाए और हर माह रिपोर्ट पेश की जाए।' वह दिन है और आज का दिन, पुलिस हर माह रिपोर्ट भेजती है- उद् घाटनवीर अब भी हंस रहा है।