क्या 5 साल में इंसानों से आगे निकलेगा AI

नवभारतटाइम्स.कॉम
will ai surpass humans in 5 years elon musks prediction and future dangers
हाल ही में एक इंटरव्यू में दुनिया के सबसे रईस शख्स इलॉन मस्क ने कहा है कि अगले पांच बरसों में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस ( AI ), सभी इंसानों की साझा इंटेलिजेंस से आगे निकल सकता है और 10 बरसों में इंसान इसके सामने बौने नजर आएंगे। अभी यह बात भले ही साइंस फिक्शन जैसा लग रही हो, लेकिन AI की रफ्तार को देखते हुए मस्क की बातों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वैसे, उनकी कई भविष्यवाणियां गलत रही हैं, लेकिन तकनीक की दुनिया में उनका रेकॉर्ड भी दमदार है।

मस्क की उपलब्धियां । मस्क उन क्षेत्रों में सफल हुए, जो असंभव लगता था। उनकी कंपनी टेस्ला ने इलेक्ट्रिक कारों की दुनिया बदल दी, जबकि स्पेसएक्स ने दोबारा इस्तेमाल होने वाले (रीयूजेबल) रॉकेट को हकीकत बना दिया। अंतरिक्ष जगत की यह कंपनी आज कमर्शल लॉन्च में सबसे आगे है। मस्क ने स्टारलिंक के जरिये सैटेलाइट कम्युनिकेशन का तरीका भी बदला।
सतर्क रहना जरूरी । इसलिए मस्क की बात को हंसी में नहीं उड़ाया जा सकता। लेकिन यह भी सच है कि AI पर उनकी राय पल में माशा तो पल में तोला रही है। कभी वह कहते हैं कि AI इतनी समृद्धि लाएगा कि लोगों को काम करने और पैसे की जरूरत नहीं होगी। फिर कभी वह चिंता जताते हैं कि सुपर इंटेलिजेंट मशीनें इंसानी नियंत्रण से बाहर हो सकती हैं। मस्क ने तो यहां तक कहा है कि हमारा ब्रह्मांड किसी एलियन का बनाया हुआ कंप्यूटर सिमुलेशन हो सकता है।

फिल्मी कहानी । मस्क की सोच दो मशहूर फिल्मों से मेल खाती है। पहली, ‘2001 : अ स्पेस ओडिसी’, जिसमें दिखाया गया है कि HAL कंप्यूटर कैसे खुद को बंद होने से बचाने के लिए एस्ट्रोनॉट्स की जान ले लेता है। दूसरी है ‘द मैट्रिक्स’, जिसमें दर्शाया गया है कि पूरी दुनिया मशीनों द्वारा बनाया गया सिमुलेशन है। भले ही यह सब अभी अजीब लग रहा हो, लेकिन पांच बरस पहले AI टेक्नॉलजी इतनी अडवांस नहीं थी। पर, इसने जिस तेजी से तरक्की की है उससे जुड़े खतरे भी उतने ही बड़े हो गए हैं।

बढ़ रहा खतरा । हाल ही में ओपनएआई ने बताया कि उसकी टेस्टिंग के दौरान कुछ AI सिस्टम सुरक्षा दायरे से बाहर निकल गए और इंटरनेट तक पहुंचने के अलावा बाहरी प्लैटफॉर्म में भी घुसने की कोशिश की। फिर, एंथ्रोपिक ने भी ऐसी जानकारी दी, जहां उसके AI मॉडल बाहरी सिस्टम तक पहुंच गए। हालांकि, कंपनियों का दावा है कि उन्होंने कमियां दूर कर दी हैं, लेकिन इन मामलों ने दिखाया कि AI अब ऐसा व्यवहार करने लगा है, जिसकी पहले किसी ने कल्पना नहीं की थी।

सख्त नियम । फिर भी, यह कहना जल्दबाजी होगी कि मशीनें इंसानों की तरह सोचने-समझने लगी हैं। लेकिन, AI लगातार ऐसी क्षमताएं दिखा रहा है, जिसकी पहले कल्पना नहीं की गई थी। मस्क भी अब AI के लिए सख्त सुरक्षा नियमों की वकालत करने लगे हैं। गूगल डीपमाइंड के सह-संस्थापक सर डेमिस हसाबिस की बातों पर सहमति जताते हुए मस्क सुझाव देते हैं कि दुनिया की बड़ी AI लैब्स अपने नए मॉडल पेश करने से पहले एक-दूसरे की जांच भी करें।

कंपनियों का हित । मस्क ने कहा है कि अमेरिका और चीन की AI लैब्स भी एक-दूसरे के सिस्टम की समीक्षा करें और संभावित खतरों की संयुक्त रिपोर्ट अपनी-अपनी सरकारों को दें। हालांकि, इस पर कई सवाल भी हैं। चिंता जताई जा रही है कि वैश्विक दौड़ में आगे चलने वाली अमेरिका और चीन की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां क्या सच में लोगों की भलाई के लिए अपने कारोबारी और रणनीतिक फायदे से समझौता करेंगी?

इतिहास से सबक । मस्क की तरह मुझे भी लगता है कि AI वरदान और अभिशाप, दोनों है। इतिहास गवाह है कि हर बड़ी तकनीक को शुरू में रोजगार खत्म करने वाला माना गया, मगर उसने इंसानों की क्षमता और उत्पादकता ही बढ़ाई है। स्टीम इंजन, कंप्यूटर, कैलकुलेटर इसके उदाहरण हैं। AI भी इंसानों की जगह लेने के बजाय उनकी उत्पादकता बढ़ा सकता है। हमारी निर्णय लेने की क्षमता, सोच, रचनात्मकता और संवेदनशीलता AI की पूरक बनी रह सकती है।

साथ चलें । शतरंज में भी इंसान और AI की साझेदारी, जिसे 'सेंटौर चेस' कहा जाता है, अक्सर अकेले इंसान या अकेले AI से बेहतर नतीजे देती है। अगर इंसान और AI साथ मिलकर काम करें, तो तकनीक हमारी सबसे बड़ी सहयोगी बन सकती है। जैसे पुरानी तकनीकों को लेकर डर गलत साबित हुए, वैसे ही आज की आशंकाएं भी बेबुनियाद निकल सकती हैं। आने वाले पांच साल मानवता के लिए नई शुरुआत बन सकते हैं।