BJP की हार

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तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे BJP के लिए झटका माने जा रहे हैं। इन तीनों ही राज्यों में पार्टी की सरकार है। बिहार में तो पिछले साल नवंबर में ही विधानसभा चुनाव में BJP ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था।

अप्रत्याशित परिणाम । बिहार की बांकीपुर सीट पर जनसुराज पार्टी के प्रशांत किशोर और मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस के घनश्याम सिंह को जीत मिली है। BJP गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट को बचाने में कामयाब रही। यहां पहले भी उसी के विधायक थे और उनके निधन के चलते सीट खाली हुई थी। इसमें बांकीपुर का परिणाम BJP के लिए अप्रत्याशित माना जा रहा है।
सम्राट के लिए चुनौती । बांकीपुर बिहार की उन चंद विधानसभा सीटों में से एक है, जहां अपर कास्ट वोटर्स ज्यादा हैं। यह वर्ग BJP की ताकत रहा है। उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार चार बार यहां से जीते थे और उनके राज्यसभा जाने की वजह से ही यहां उपचुनाव कराना पड़ा।

सम्राट पर दबाव । यह सीट संगठन के साथ-साथ बिहार के सीएम सम्राट चौधरी के लिए भी चुनौती मानी जा रही थी। सम्राट राज्य के पहले BJP सीएम हैं और अप्रैल में ही उन्होंने पद संभाला है। उनकी एनकाउंटर नीति विवादों में है। रोजगार और पलायन को भी विपक्ष लगातार मुद्दा बना रहा है। अब सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि एक सीट के आधार पर जनसुराज या पीके को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

नए विकल्प । एमपी और बिहार, दोनों जगह जनता ने नए विकल्पों में दिलचस्पी दिखाई है। बांकीपुर में उसने उस बदलाव को अपनाया, जिसे विधानसभा चुनाव में नकार दिया था। तब जनसुराज एक भी सीट नहीं जीत सकी थी, बल्कि दो को छोड़ बाकी सभी उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई थी। वहीं, दतिया में आजाद समाज पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

उम्मीदवारी पर विवाद । बांकीपुर और दतिया में BJP की उम्मीदवारी पर भी विवाद हुआ। बांकीपुर में तो अंतिम वक्त पर प्रत्याशी बदला गया, जबकि दतिया में वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने की वजह से हंगामा हुआ। ये दोनों फैक्टर भी नजरअंदाज नहीं किए जा सकते।

स्टूडेंट्स फैक्टर । उपचुनावों को आमतौर पर सत्ताधारी पार्टी का माना जाता है, क्योंकि जनता ऐसा जनप्रतिनिधि चाहती है, जो सरकार तक उनकी बात पहुंचा सके। ऐसे में दो जगहों पर मिली हार BJP के लिए चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है। ये उपचुनाव NEET पेपर लीक के शोर में हुए थे, तो छात्रों के गुस्से का असर भी मापा जाएगा।