Supreme Courts Historic Verdict Nigam Wins 272 Acre Land Battle Ownership Rights Restored On Property Worth 25 Thousand Crores
निगम ने सुप्रीम कोर्ट में जीती 272 एकड़ ज़मीन की लड़ाई
नवभारतटाइम्स.कॉम•
nNBT रिपोर्ट, गुड़गांव
वजीराबाद गांव के साथ लगते हैदरपुर गांव की बेशकीमती जमीन के मामले में नगर निगम को सुपीम कोर्ट से बड़ी जीत हासिल हुई है। 272 एकड़ जमीन की कानूनी लड़ाई नगर निगम ने जीत ली है। आज के मॉर्केट वैल्यू के हिसाब से यह जमीन करीब 25 हजार करोड़ रुपये की बताई जा रही है। करीब 19 साल पहले पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के निगम के खिलाफ दिए फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करते हुए इस जमीन पर 1955 में हुई म्यूटेशन को सही ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम पंचायत और निगम के पक्ष में इस जमीन का फैसला सुनाया है। इस जमीन पर कुछ लोगों ने अपना मालिकाना हक जताते हुए इसे 23 दिनाें के अंदर 265 डिवेलपर्स और अन्य लोगाें को बेच दिया था। यह जमीन अभी भी खाली पड़ी है, कोर्ट में मामला होने के कारण इस पर निर्माण कार्य नहीं हो सका है। हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया फैसला
सुप्रीम कोर्ट में नगर निगम ने इस जमीन का 1877 से लेकर 2026 तक का रेकॉर्ड जमा करवाया। मामले की लगातार सुनवाई हुई। निगम ने पुरजोर तरीके से इस लड़ाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 2007 में आए पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। फैसला दिया गया कि यह जमीन प्राइवेट न होकर पब्लिक यूटिलिटी की ग्राम पंचायत की जमीन है। हैदरपुर गांव बे चिराग था। यह वह गांव होता है जो रेवेन्यू रेकॉर्ड में होता है, लेकिन वहां पर कोई रहता नहीं है। देश की आजादी के बाद इस 272 एकड़ जमीन की म्यूटेशन पंजाब विलेज कॉमन लैंड्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1953 के तहत गांव वजीराबाद के नाम पर थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 1955 की म्यूटेशन को बहाल रखा
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के 24 अगस्त 2007 के फैसले को निरस्त करते हुए वर्ष 1955 की म्यूटेशन को बहाल रखा और स्पष्ट किया कि इसका लाभ नगर निगम को मिलेगा। साथ ही सभी लंबित हस्तक्षेप और अन्य आवेदन भी खारिज कर दिए गए। प्रत्येक पक्ष को अपना-अपना खर्च स्वयं वहन करने का निर्देश दिया गया। निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया ने निगम के तहसीलदार हरकेश गुप्ता और निगम की पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे ऐतिहासिक फैसला बताया। साथ ही कहा कि यह जमीन पब्लिक यूटिलिटी के लिए है। इसके लिए निगम टीम ने दशकों तक लंबी लड़ाई लड़ी है।