बच्चों के लिए क्यों कूल बनी भद्दी भाषा

नवभारतटाइम्स.कॉम
the appeal of vulgar language for children causes and solutions
हम सभी के बचपन में एक बात लगभग समान थी। अगर पैरंट्स किसी बच्चे के बारे में कहते कि उसकी भाषा अच्छी नहीं है और उससे दूर रहो, तो हम मान जाते। अब अक्सर यह होता है कि बच्चे उन साथियों की ओर ही ज्यादा आकर्षित होते हैं, जो भद्दी भाषा बोलते हैं और नियम तोड़ते हैं। इसके पीछे सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी स्तर पर हुए कई बदलाव जिम्मेदार हैं।

बदलता एंटरटेनमेंट । फिल्मों, टेलिविजन, OTT की दुनिया में भाषा तेजी से बदली है। कई बार पात्रों को प्रभावशाली और आधुनिक दिखाने के लिए भी ऐसी भाषा इस्तेमाल की जाती है। बच्चे जब इन पात्रों को लोकप्रिय होते देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि भद्दी भाषा आत्मविश्वास और आकर्षण का प्रतीक है।
सोशल मीडिया का असर । कई कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर ज्यादा लाइक व सब्सक्रिप्शन हासिल करने के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। जब उनका कंटेंट वायरल होता है, तो यह धारणा बनना आम है कि लोकप्रियता हासिल करने का यही नया मंत्र है।

दोस्ती की खातिर । हर बच्चे की इच्छा होती है कि उसे ग्रुप में स्वीकार किया जाए। अब अगर बच्चों के किसी ग्रुप में गालियों को मजाक, आधुनिकता या बहादुरी का प्रतीक माना जाता है, तो बाकी बच्चे भी उसी व्यवहार को अपनाने लगते हैं। कई बार उन्हें पता होता है कि यह गलत है, लेकिन ग्रुप में दोस्ती बनाए रखने के लिए वह इसे टाल जाते हैं।

संवाद की कमी । आजकल माता-पिता प्रफेशनल लाइफ में व्यस्त हैं। घर में भी लोग ज्यादा बिजी रहते हैं फोन पर। परिवारों में संवाद कम हो चला है। ऐसे में बच्चे भी परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत के बजाय स्क्रीन पर अधिक समय बिताते हैं। स्वाभाविक है, वे भाषा और व्यवहार इंटरनेट से ही सीखेंगे। ध्यान रखने वाली बात है- भद्दी भाषा का प्रयोग करने वाले बच्चे बुरे नहीं होते। कई बार वे बस अलग दिखने और धाक जमाने के लिए ऐसा बोलते हैं। समस्या तब है, जब यह आदत उनकी पहचान बन जाती है और वे सम्मानजनक बातचीत करना भूल जाते हैं।

सजा समाधान नहीं । अमेरिकन अकैडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के मुताबिक, कई बार बच्चे उन शब्दों का मतलब भी नहीं जानते, जिनको बोल रहे होते हैं। उन्होंने सुना होता है, तो दोहराने लगते हैं। इस चुनौती का समाधान सजा देने या डांटने में नहीं। घर और स्कूल में सम्मानजनक बातचीत का वातावरण तैयार करना जरूरी है। बच्चों को समझाया जाए कि प्रभावशाली व्यक्ति वह नहीं होता जो अधिक गालियां देता है, वह होता है जो अपने विचारों को दृढ़ता, आत्मविश्वास और सम्मान के साथ व्यक्त कर सकता है।

(लेखिका शिक्षा के क्षेत्र में काम करती हैं)