चांद पर पहला क़दम

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first step on the moon neil armstrongs adventurous landing and humanitys victory
बात 20 जुलाई 1969 की है। नील आर्मस्ट्रॉन्ग का लूनर मॉड्यूल ईगल चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला था। सब कुछ योजना के अनुसार नहीं चल रहा था। कंप्यूटर यान को ऐसे स्थान की ओर ले जा रहा था, जहां विशाल चट्टानें और गहरे गड्ढे थे। एक छोटी-सी चूक वर्षों की मेहनत और मानवता के सबसे बड़े अंतरिक्ष अभियान को विफल कर सकती थी। लेकिन, आर्मस्ट्रॉन्ग ने संकट की उस घड़ी को हावी नहीं होने दिया। उन्होंने तुरंत यान का नियंत्रण अपने हाथ में लिया और सुरक्षित स्थान की तलाश करते हुए सफलतापूर्वक लैंडिंग कराई। कुछ क्षण बाद उनका संदेश पूरी दुनिया ने सुना, ‘ह्यूस्टन (मिशन कंट्रोल), ट्रैंक्विलिटी बेस बोल रहा है। ईगल सुरक्षित उतर चुका है।’ कुछ घंटों बाद चंद्रमा पर रखा उनका पहला कदम मानव सभ्यता के लिए नई संभावनाओं का द्वार बन गया। नील आर्मस्ट्रॉन्ग के जीवन की घटना याद दिलाती है कि कठिनाइयां अक्सर अंतिम क्षणों में सबसे बड़ी दिखाई देती हैं। जो व्यक्ति आगे बढ़ता है, जो भय के शोर में भी अपने विवेक की आवाज सुन सुनता है, उसे ही इतिहास याद रखता है। इतिहास केवल बड़े सपनों से नहीं बनता, कई बार वह कुछ निर्णायक क्षणों में लिए गए शांत और साहसी निर्णयों से लिखा जाता है।