सोरेन सरकार की चुनौती

नवभारतटाइम्स.कॉम
jharkhand recruitment dispute pressure on soren government challenge to win youth trust
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में चल रहे भर्ती विवाद पर पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि सरकार अभ्यर्थियों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और सभी पहलुओं से जांच के बाद उचित समय पर फैसला लिया जाएगा। सीएम का आश्वासन महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ ठोस कार्रवाई की भी जरूरत है।

परीक्षाओं में गड़बड़ी । झारखंड लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की भर्तियों में गड़बड़ियों के आरोप युवा लंबे समय से लगा रहे हैं। जिस समय जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन चल रहा था, लगभग उसी दौरान झारखंड में भी युवा भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। 29 जुलाई से ये युवा राज्य की राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हुए हैं।
सरकार पर अविश्वास । प्रदर्शनकारियों ने मामले की CBI और ED से जांच कराने की मांग की थी। मंगलवार को उन्होंने इसमें बदलाव करते हुए कहा कि झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों के पैनल को जांच सौंपी जाए। युवाओं का भरोसा CID जांच पर नहीं है और यह राज्य सरकार के प्रति अविश्वास को भी दर्शाता है। सोरेन सरकार के सामने एक तरह से दोहरी चुनौती है। उसे दोषियों को तो कटघरे में खड़ा ही करना है, ऐसे कदम भी उठाने होंगे, जिससे युवाओं का भरोसा दोबारा से सिस्टम पर जमे। इसका एक तरीका है, उनसे जल्द और सीधा संवाद।

सीधा संवाद जरूरी । सीएम ने मीडिया के जरिये अपनी बात रखी है। इसके साथ युवाओं से सीधे जुड़ने की कोशिश भी होनी चाहिए। हो सकता है कि प्रयास चल भी रहे हैं, तो इसके बारे में सार्वजनिक जानकारी देने में हर्ज नहीं। सरकार को बताना चाहिए कि अभी तक क्या कार्रवाई की गई है, नतीजा क्या निकला है और आगे की प्रक्रिया क्या होगी। आंदोलन लंबा खिंचने से असंतोष और तनाव बढ़ेगा। राजनीतिक विवाद का रूप लेने की संभावना रहेगी।

संस्थाओं में सुधार चाहिए । कॉकरोच जनता पार्टी ने इस आंदोलन का समर्थन किया है। कई दूसरे संगठन और दल भी साथ खड़े हो रहे हैं। युवाओं को सपोर्ट चाहिए, और उससे भी ज्यादा जरूरी ऐसी व्यवस्था, जिसमें परीक्षाओं और भर्तियों के नाम पर बार-बार धांधली न हो। इस विवाद से फिर महसूस होता है कि देश में महत्वपूर्ण परीक्षाएं कराने वाली संस्थाओं में सुधार की जरूरत है। जवाबदेही तय की जानी चाहिए और गड़बड़ी के बाद शोर मचाने से बेहतर है, रोक लगाने का मैकेनिज्म।