New Education Policy 2020 Indian Knowledge Tradition And The Path To Freedom From Colonial Thinking
भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ा रही नई शिक्षा नीति
नवभारतटाइम्स.कॉम•
शिक्षा सिर्फ ज्ञान का हस्तांतरण नहीं, सोच, दृष्टि और व्यक्तित्व का निर्माण करती है। सन 1835 में टी.बी. मैकाले की शिक्षा नीति का मकसद ब्रिटिश शासन के लिए बाबू तैयार करना और भारत के सांस्कृतिक आधार को कमजोर करना था। मैकाले ने भारतीय साहित्य, दर्शन, चिकित्सा, गणित आदि को पश्चिमी विज्ञान से कमतर साबित करने की कोशिश की। इसके बाद भारतीय भाषाओं का महत्व कम हो गया। अंग्रेजी पढ़ने वाला एक खास वर्ग तैयार हुआ, जो सरकार की जरूरतों के हिसाब से काम करता था। स्वतंत्रता के बाद भी भारत इससे पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया।
हुनरमंद बनाने पर जोर राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 शिक्षा को औपनिवेशिक सोच से मुक्त करने की दिशा में सरकार द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें मातृभाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा और कौशल आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया है। नई पाठ्यचर्या और किताबें छात्र-छात्राओं को भारत की संस्कृति, लोक कथाओं, शिल्प, संगीत और जीवन मूल्यों से जोड़ती हैं। इनका उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, व्यक्तित्व विकास, आत्मबोध, नैतिकता और समाज से जुड़ाव को बढ़ावा देना है, ताकि शिक्षा अधिक जीवंत, संदर्भ पूर्ण और भारतीय परिवेश के अनुरूप बन सके।
नई शिक्षा नीति में विद्यार्थियों में देश प्रेम और राष्ट्र गौरव का भाव विकसित करने पर खास तौर पर जोर दिया गया है। कई मायनों में यह नीति महात्मा गांधी की बुनियादी तालीम की अवधारणा से मेल खाती है, जिसमें नैतिकता, चरित्र निर्माण, कारीगरी, स्थानीय ज्ञान और देशभक्ति को महत्व दिया गया था। गांधीजी ने अंग्रेजों की शिक्षा को भारतीय भाषा, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से दूर करने वाली व्यवस्था बताया था। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उसी ऐतिहासिक कमी को दूर करने का प्रयास है। नई पाठ्यपुस्तकों में राष्ट्रीय प्रतीकों, युद्ध स्मारकों और मेजर सोमनाथ शर्मा, कप्तान विक्रम बत्रा, कप्तान अनुज नैयर, अब्दुल हमीद और ब्रिगेडियर उस्मान जैसे वीरों की गाथाएं शामिल की गई हैं, ताकि विद्यार्थियों में देशभक्ति, कर्तव्यबोध और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।
मातृभाषा को मिला महत्व
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का दर्शन महर्षि अरविंद के उस चिंतन से मेल खाता है, जिसमें उन्होंने औपनिवेशिक शिक्षा को बौद्धिक और आध्यात्मिक कमजोरी का कारण बताया था। इसी सोच के अनुरूप नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा, गणित, विज्ञान, आयुर्वेद, जल संरक्षण और स्थानीय ज्ञान को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। पंचतंत्र, जातक कथाएं, लोक कथाएं, कला, संगीत, योग, पारंपरिक खेल और अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टि, सांस्कृतिक चेतना, रचनात्मकता और सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने की भी कोशिश की गई है।
देश की ज्ञान परंपरा का प्रभावी समावेशन मातृभाषा आधारित शिक्षा से ही संभव है। इसीलिए, नई शिक्षा नीति में मातृभाषा और बहुभाषिक शिक्षा को तवज्जो दी गई है। स्वामी विवेकानंद ने भी मातृभाषा आधारित शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्रबोध पर बल दिया था। इसी दिशा में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने 121 भारतीय भाषाओं में प्राइमर तैयार किए हैं। इनमें 80 से अधिक जनजातीय भाषाएं हैं।
बहुआयामी होगी पढ़ाई
नई शिक्षा नीति के अनुरूप NCERT ने पढ़ाई-लिखाई को महज किताबों तक सीमित न रखकर बहुआयामी बनाया है। नई पाठ्य पुस्तकों में चेरापूंजी, ओणम, बिहू, कोणार्क, हॉर्नबिल उत्सव, लोक कलाओं और देश के विविध खान-पान व जीवनशैली को समान स्थान देकर भारत की सांस्कृतिक विविधता को सम्मान दिया गया है। NCERT ने मूल्यांकन को भी केवल परीक्षा तक सीमित न रखकर होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड अपनाया है। इससे विद्यार्थियों के शैक्षिक, सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास के साथ आलोचनात्मक चिंतन, डिजिटल सोच, करुणा और नैतिक विवेक को भी प्रोत्साहन मिलता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय शिक्षा को औपनिवेशिक सोच से मुक्त कर भारतीय मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टि, सांस्कृतिक चेतना और व्यक्तित्व निर्माण से जोड़ती है। विकसित भारत के लिए संज्ञानात्मक औपनिवेशीकरण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।