अरावली पर हाई पावर कमिटी की परामर्श प्रक्रिया पर सवाल

नवभारतटाइम्स.कॉम
aravalli conservation questions raised on high power committees consultation process allegations of information not reaching villagers
n NBT न्यूज, गुड़गांव: अरावली के संरक्षण और सीमांकन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई पावर कमिटी की सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया पर पीपल फॉर अरावली समूह ने गंभीर सवाल उठाए हैं। समूह ने 4 अगस्त को समिति को भेजे ज्ञापन में आरोप लगाया कि 21 जुलाई को जारी सार्वजनिक सूचना प्रभावित ग्रामीणों तक नहीं पहुंची है और इससे सुप्रीम कोर्ट के भागीदारों को शामिल कर निष्पक्ष राय लेने की कवायद प्रभावित हो सकती है।

समूह की ओर से अधिवक्ता कृति भाटिया ने कहा कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश के 64 अरावली जिलों में अधिकांश ग्रामीण, सरपंच और स्थानीय समुदायों को यह जानकारी ही नहीं है कि समिति सुझाव मांग रही है। सूचना न तो प्रमुख सरकारी वेबसाइटों और नोटिस बोर्डों पर प्रमुखता से प्रदर्शित की गई और न ही समाचार पत्रों, रेडियो या सोशल मीडिया के जरिए इसका प्रचार किया गया। वहीं, सुझाव केवल ई-मेल और गूगल फॉर्म के माध्यम से मांगे गए हैं जबकि अधिकांश ग्रामीण, किसान और पशुपालक डिजिटल माध्यमों का उपयोग नहीं कर पाते। ज्ञापन में डाक से सुझाव लेने और समय-सीमा 21 दिन से बढ़ाने की मांग की गई है।