संवाद हो, सदन चले

नवभारतटाइम्स.कॉम
parliamentary stalemate initiative for dialogue but when will the house run
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की, ताकि संसद में जारी गतिरोध खत्म किया जा सके। सरकार और विपक्ष के बीच बने मौजूदा टकराव को देखते हुए यह पहल अच्छी है। सदन सुचारू रूप से चले, इसकी पहली जिम्मेदारी सरकार की होती है। ऐसे में उसकी तरफ से प्रयास किया ही जाना चाहिए।

काम में बाधा । यह मॉनसून सत्र NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलन के साये में शुरू हुआ था। आंदोलन तो खत्म हो गया, लेकिन इससे जुड़े मुद्दे अब भी गतिरोध की वजह बने हुए हैं। CJP के संसद चलो मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस लगातार आक्रामक रुख बनाए हुए है। राम मंदिर में चंदा चोरी के आरोपों को लेकर भी राजनीतिक माहौल गर्म है। इन सबकी वजह से दोनों सदनों का काम लगातार बाधित हो रहा है।
बिना चर्चा पास । इस सत्र में अभी तक लोकसभा में एक भी प्रश्नकाल पूरा नहीं हो सका है। पांच बिल पास हुए हैं, लेकिन बिना चर्चा के। यहां तक कि जब लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पेश किया गया, तब भी वक्त का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया। भले ही बिल पास हो रहे हों और सरकार अपने विधायी कार्य आगे बढ़ा रही हो, लेकिन यह तस्वीर लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है। संसदीय परंपरा में बहस और चर्चा सदन की कार्यवाही के सबसे जरूरी अंग हैं। इसी से बेहतरी का रास्ता मिलता है।

सवाल का महत्व । प्रश्नकाल का सबसे ज्यादा महत्व तो खुद विपक्ष के लिए है। इससे सरकार की जवाबदेही तय करने में मदद मिलती है। मंत्रियों से सीधे सवाल पूछे जाते हैं और जनता के मुद्दों को सदन के पटल पर रखा जाता है। सरकार के लिए भी यह आईना है कि उसकी नीतियां और योजनाएं सही दिशा में हैं या नहीं और उसी हिसाब से वह बदलाव कर सकती है।

हंगामा हल नहीं । सरकार और विपक्ष के बीच टकराव पिछले बजट सत्र में भी था, लेकिन वहां फिर भी कामकाज बेहतर हुआ। लोकसभा की उत्पादकता 93% और राज्यसभा की 110% रही थी। एक बार फिर से यही कोशिश होनी चाहिए कि सदन अधिकतम कार्य करे। राजनीतिक मतभेदों को मिलकर सुलझाया जाए। बताया जा रहा है कि सरकार ने परिसीमन बिल पर भी विपक्ष का मन टटोला है। अभी बेहद महत्वपूर्ण FCRA बिल भी पेश होना है। सरकार को विपक्ष से संवाद करना चाहिए ताकि आगे सदन की कार्यवाही में कोई रुकावट न आए। विपक्ष को भी केवल हंगामे और विरोध से बचना चाहिए।