'प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय'

नवभारतटाइम्स.कॉम
'प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय'
nNBT न्यूज, लखनऊ: कबीर ये घर प्रेम का, खाला का घर नाहीं... संत कबीर की इन पंक्तियों की गूंज जब नैशनल पीजी कॉलेज के सभागार में गूंजी, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। यायावर रंगमंडल द्वारा ' अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस 2026 ' पर 'उत्तर प्रदेश स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी' के सौजन्य से नृत्य-नाटिका ‘प्रेम न हाट बिकाय’ की अद्भुत प्रस्तुति दी गई।

डॉ. छवि मिश्रा के संवेदनशील लेखन और पुनीत मित्तल के प्रभावी निर्देशन में तैयार इस प्रस्तुति ने फास्ट-लाइफ और भौतिकवादी दौर में सच्चे आत्मिक प्रेम का महत्व समझाया। नाटक की सबसे बड़ी खासियत इसका संगीत और नृत्य संयोजन रहा। कथक, भरतनाट्यम और कंटेंपररी नृत्य शैलियों के साथ जब 'चदरिया झीनी रे झीनी', 'सैयां' और 'दमादम मस्त कलंदर' जैसे सूफी गीतों की लय जुड़ी, तो एचआईवी जागरूकता का संदेश सीधा दिल में उतर गया।
कहानी मुख्य पात्र 'अनवर' के भटकाव, शारीरिक आकर्षण से उपजी गलतियों और बाद में सूफी संत के सानिध्य से हुए आत्मज्ञान के इर्द-गिर्द घूमती है। नाटिका यह संदेश देकर समाप्त होती है कि साथी के प्रति वफादारी और आध्यात्मिक प्रेम ही जीवन का सच्चा आधार है।