जल्द चुनना होगा चंद्रशेखरन का उत्तराधिकारी

Contributed byMrityunjay.Ray,नई दिल्ली|नवभारतटाइम्स.कॉम
जल्द चुनना होगा चंद्रशेखरन का उत्तराधिकारी
नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बुधवार को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को लिखा कि जल्द उनका उत्तराधिकारी चुन लिया जाए। चंद्रशेखरन का कार्यकाल अगले साल फरवरी में पूरा हो रहा है। छह महीने पहले बोर्ड ने उनके कार्यकाल को 5 साल और बढ़ाने का फैसला टाल दिया था। तब इस पर बोर्ड के सदस्यों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई थी।

टाटा संस में 66% हिस्सेदारी टाटा ग्रुप के ट्रस्टों की है। इन ट्रस्टों के चेयरमैन नोएल टाटा हैं। वह चंद्रशेखरन को फिर से टाटा संस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल नहीं करना चाहते थे। 18 अगस्त को टाटा संस की एनुअल जनरल बॉडी मीटिंग (AGM यानी सालाना आम बैठक) प्रस्तावित है। अगर चंद्रशेखरन फिर से कंपनी के डायरेक्टर नहीं बनते यानी उन्हें बोर्ड का मेंबर नहीं बनाया जाता तो चेयरमैन के रूप में अगला कार्यकाल भी नहीं मिलता।
इस साल 24 फरवरी को टाटा संस की बोर्ड मीटिंग अजीब रही थी। इसमें नोएल टाटा ने ग्रुप की अनलिस्टेड (जो शेयर बाजार में नहीं हैं) कंपनियों को हो रहे घाटे को लेकर सवाल उठाए थे। यह हैरान करने वाली खबर थी। अजीब यह भी है कि इससे पहले चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने पर टाटा ग्रुप के ट्रस्टों ने हामी भरी थी, लेकिन नोएल ने इसकी मंजूरी के लिए तब कई शर्तें रखीं।

साल की शुरुआत में टाटा संस के चार डायरेक्टर चंद्रशेखरन को एक और कार्यकाल देना चाहते थे। वे इस पर बोर्ड में वोटिंग कराने को भी तैयार थे। मगर तब चंद्रशेखरन ने ही इसे टालने का सुझाव दिया था। उनका मानना था कि टाटा संस में कोई भी फैसला सभी डायरेक्टरों की सहमति से होना चाहिए। दरअसल, रतन टाटा इसी फलसफे पर चलते थे और उन्होंने ही चंद्रशेखरन को साइरस मिस्त्री की जगह टाटा संस का चेयरमैन चुना था। यानी चंद्रशेखरन चाहते थे कि उन्हें एक और कार्यकाल देने पर नोएल टाटा भी रजामंद हो जाएं।

नोएल टाटा क्यों नारज थे ?

नोएल टाटा ग्रुप की अनलिस्टेड कंपनियों में घाटे को लेकर चंद्रशेखरन से नाराज थे। पिछले वित्त वर्ष में एयर इंडिया का घाटा दोगुना बढ़कर 22,238 करोड़ हो गया था, जबकि टाटा ग्रुप के डिजिटल बिजनेस में शामिल कंपनियों को 4,974 करोड़ का नुकसान हुआ। एयर इंडिया इस बीच ग्राहकों को बेहतर सेवा देने के लिए नए विमान सहित दूसरी चीजों पर भी खर्च कर रही थी।

आगे क्या हो सकती है टाटा

ग्रुप की परेशानी?

इस पूरे घटनाक्रम से टाटा ग्रुप की परेशानी बढ़ सकती है क्योंकि चंद्रशेखरन ने अचानक पद छोड़ने का ऐलान किया है। उनका कार्यकाल फरवरी में खत्म हो जाएगा। इसलिए ग्रुप के पास उनका उत्तराधिकारी चुनने के लिए बहुत कम समय है।