क्या डोप टेस्ट नहीं है भरोसेमंद

नवभारतटाइम्स.कॉम
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फुकेट से दिल्ली आ रहा एयर इंडिया का विमान हवा में अचानक 300 फीट नीचे गिर गया। हादसे में 20 यात्री और 4 क्रू सदस्य घायल हो गए। इस घटना ने विमानन उद्योग में पायलटों की ट्रेनिंग और ड्रग टेस्टिंग पर कई सवाल खड़े किए शुरुआती जांच में AI 2379 के पायलट-इन कमांड (PIC) का ड्रग टेस्ट नॉन निगेटिव था, लेकिन कंफर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना के सेवन की पुष्टि हुई।

सुरक्षा पर सवाल । उड़ान के दौरान PIC कॉकपिट के फर्श पर बैठे थे। केबिन क्रू के सदस्यों ने भी इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इस बीच, ट्रिपल हाइड्रोलिक फेलियर की भी चर्चा चल रही है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) 3 सितंबर तक शुरुआती रिपोर्ट जारी करेगा। अगर रिपोर्ट से तस्वीर साफ नहीं हुई, तो अंतिम रिपोर्ट के लिए एक साल या उससे ज्यादा भी लग सकते हैं। जांच रिपोर्ट चाहे जो हो, इस घटना ने पायलटों की फिटनेस और उड़ान सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
दो अलग विषय । ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आने का मतलब यह नहीं कि पायलट ने किसी प्रतिबंधित पदार्थ का सेवन किया था, जिससे उसकी क्षमता प्रभावित हुई। ये दो अलग सवाल हैं और इनका जवाब उतना आसान नहीं है, जितना लगता है। टेस्ट से यह पता चल सकता है कि शरीर में किसी प्रतिबंधित पदार्थ या उसके अवशेष मौजूद थे, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि उड़ान के समय पायलट की क्षमता प्रभावित थी।

ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण । जनवरी 2023 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट के पास दो साइटसीइंग हेलीकॉप्टर टकरा गए। इसमें एक पायलट की जान चली गई। जांच में उसके शरीर में कोकीन के मेटाबोलाइट्स की बहुत कम मात्रा मिली। एक नजर में यह भले गंभीर लगे, लेकिन ऑस्ट्रेलियन ट्रांसपोर्ट सेफ्टी ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, मात्रा कम थी। पायलट की क्षमता प्रभावित होने के सबूत नहीं मिले।

आम स्थिति । AI 2379 वाली घटना शायद इस पर फिट न बैठे, क्योंकि अगर कॉकपिट के फर्श पर पायलट के बैठने की बात सही है, तो यह क्षमता प्रभावित होने की ओर इशारा करता है। लेकिन, गोल्ड कोस्ट की घटना अपवाद नहीं, बल्कि विमानन क्षेत्र में सामने आने वाली आम स्थिति के ज्यादा करीब है।

सिस्टम की दरकार । ड्रग टेस्ट के पीछे के विज्ञान को समझना जरूरी है। DGCA के सामने असल चुनौती यही है। उसे ऐसा सिस्टम बनाना होगा जो नियम तोड़ने वाले पायलटों को पकड़ सके, लेकिन उन पायलटों को सजा न मिले जिन्होंने Antihistamine जैसी सामान्य दवा ली हो। उद्देश्य सख्ती के साथ-साथ निष्पक्ष जांच होना चाहिए।

कानूनी सबूत नहीं । पायलटों की संस्था ALPA इंडिया ने भी कहा है कि नॉन-निगेटिव स्क्रीनिंग अपने आप में ड्रग्स के गलत इस्तेमाल का कानूनी या मेडिकल सबूत नहीं है। संस्था ने पायलटों को खसखस वाली चीजें खाने से बचने की सलाह दी है, क्योंकि इससे भी टेस्ट रिपोर्ट कई बार पॉजिटिव आने की संभावना रहती है। 2022 के तय नियमों के तहत हर साल कम से कम 10% क्रू और ATC का रैंडम ड्रग टेस्ट जरूरी है।

मुश्किल काम । अब सवाल है कि पॉजिटिव ड्रग टेस्ट से साबित क्या होता है? शराब के मामले में स्थिति साफ है। ब्रेथलाइजर से व्यक्ति की कार्यक्षमता का पता लग जाता है। लेकिन, ड्रग टेस्टिंग इतनी सरल नहीं है। यूरिन टेस्ट से यह पता चलता है कि किसी पदार्थ या उसके मेटाबोलाइट की मात्रा तय सीमा से ज्यादा है। लेकिन, यह नहीं पता चलता कि ड्रग कब ली गई थी और उड़ान के समय असर था या नहीं।

NTSB की रिपोर्ट । अमेरिकी एजेंसी NTSB की मई में प्रकाशित रिसर्च से पता चला कि 2018 से 2022 के बीच हादसों में मारे गए अमेरिकी पायलटों में 53% कम से कम ड्रग पॉजिटिव थे। 29% में ऐसे पदार्थ पाए गए, जिससे उनकी क्षमता प्रभावित हुई। सबसे आम पदार्थ कोकीन या मारिजुआना नहीं, बल्कि डिफेनहाइड्रामाइन था, जो बेनाड्रिल जैसी OTC एंटीहिस्टामाइन दवाओं में पाया जाता है। NTSB ने साफ किया कि शरीर में किसी पदार्थ की मौजूदगी का मतलब क्षमता प्रभावित होना नहीं है। DGCA को इसी फर्क को पकड़ने वाला सिस्टम बनाना होगा। AI 2379 ने इस कमी को नजरअंदाज करना मुश्किल कर दिया है।