रास्ता ख़ुद निकल आता है, जब जीवन में कोई उद्देश्य हो

Contributed byधीरेन शाह|नवभारतटाइम्स.कॉम
purpose of life when there is a goal the path creates itself
‘जिसके पास जीने का कोई कारण है, वह लगभग हर परिस्थिति को सह सकता है।’ विक्टर फ्रैंकल की प्रसिद्ध पुस्तक ‘Man’s Search for Meaning’ की यह बात जीवन के एक गहरे सत्य की ओर संकेत करती है। जिसके जीवन में कोई उद्देश्य होता है, वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का रास्ता खोज लेता है।

नाजी यातना शिविरों में लंबे समय तक रहने वाले फ्रैंकल ने देखा कि जिन कैदियों ने जीने की इच्छा और कोई उद्देश्य खो दिया, वे जल्दी टूट गए। इसके विपरीत वे लोग अधिक मजबूत बने रहे, जिनके पास लौटने के लिए कोई प्रियजन और पूरा करने के लिए कोई अधूरा काम था या यह विश्वास था कि उनके संघर्ष का भी कोई अर्थ है। फ्रैंकल के लिए जीवन का अर्थ हमेशा सुख प्राप्त करना नहीं रहा। उनके लिए इसका मतलब था कि परिस्थितियां कैसी भी हों, उनके प्रति अपनी प्रतिक्रिया चुनना।
जीवन का उद्देश्य केवल कठिन समय में ही जरूरी नहीं होता। आज हमारे पास बेहतर सुविधाएं, अधिक आय, भरपूर भोजन, आधुनिक चिकित्सा और आरामदायक घर है। फिर भी चिंता, अकेलापन और भीतर का खालीपन बढ़ता जा रहा है। शायद इसका कारण यह है कि सुख-सुविधाएं आराम तो दे सकती हैं, लेकिन अर्थ नहीं। हम अक्सर यह सोचते हैं कि जीवन हमें क्या देगा, जबकि हमें यह पूछना चाहिए कि जीवन हमसे क्या चाहता है।

जीवन का उद्देश्य हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। किसी के लिए परिवार की जिम्मेदारियां निभाना ही उद्देश्य है, तो किसी के लिए ज्ञान अर्जित करना, समाज की सेवा करना, कला या विज्ञान में योगदान देना। किसी व्यक्ति का उद्देश्य किसी दूसरे की मदद करना भी हो सकता है। उद्देश्य हमेशा बड़ा या असाधारण ही हो, यह जरूरी नहीं। किसी दुखी व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाना भी जीवन को अर्थ दे सकता है। जीवन हममें से हर व्यक्ति को एक भूमिका देता है। उस भूमिका को ईमानदारी, संवेदनशीलता और निष्ठा से निभाना ही शायद जीवन का वास्तविक उद्देश्य है। जब हम अपने लिए जीने के साथ-साथ दूसरों के लिए उपयोगी बनना सीखते हैं, तब एक गहरी संतुष्टि जन्म लेती है।