80th Independence Day Voice Of Youth And New Resolve For Developed India
एक नया संकल्प
नवभारतटाइम्स.कॉम•
आज देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 79 बरसों की इस कहानी में अनगिनत उपलब्धियां हैं, जिन पर गर्व किया जा सकता है। 1947 में जिन हालात में भारतवासियों को यह देश सौंपा गया था, उम्मीद बहुत कम को थी कि सफर इतना लंबा होगा। लेकिन, इस देश ने अपनी इच्छाशक्ति से आलोचकों को हर कदम पर हैरान किया।
सबसे बड़ी ताकत । आज यह कहानी उस देश और वहां के लोगों की जिजीविषा की है, जिन्हें उनकी विविधताओं ने बांध रखा है। ऐसा शायद कहीं और नहीं, जहां पहचान के इतने रंग होने के बावजूद सभी एक तिरंगे में रंगे हों। हां, मुश्किलें जरूर आईं समय-समय पर, लेकिन असल बात है कि उनका जवाब किस तरह दिया गया। यह मौका इसी का जश्न है। लेकिन, जरूरत आत्म-अवलोकन की भी है।बदलाव की मांग । यह स्वतंत्रता दिवस ऐसे वक्त मनाया जा रहा है, जब देश में युवाओं का सवाल मुखर है। दिल्ली से लेकर रांची तक, सड़कों पर उतरे स्टूडेंट्स ने यह अहसास कराया है कि अब बदलाव की जरूरत है। आजादी मिलने का मतलब बस वहीं थम जाना नहीं, एक नए रास्ते पर निकलना है। दरअसल युवा जो मांग रहे हैं, वो वही है जिसका सपना आजादी के वक्त भी देखा गया था - सबको समान मौका, संवेदनशील राज्य, ईमानदारी और निरपेक्षता।
असली कसौटी । यह साल अभी तक चुनौतियों से भरा रहा है। पश्चिम एशिया संकट के रूप में एक बड़ी परीक्षा देनी पड़ी, जो अभी खत्म नहीं हुई है। पूरी दुनिया जब मंदी जैसे हालात से गुजर रही थी, तब भी भारत ने स्वतंत्र विदेश नीति, मजबूत आर्थिक बुनियादी ढांचे और भरोसेमंद द्विपक्षीय संबंधों के जरिये आर्थिक मोर्चे पर स्थिरता बनाए रखी। हालांकि किसी देश की सफलता केवल आर्थिक आंकड़ों से तय नहीं होती। असली कसौटी है कि नागरिक खुद को कितना सुरक्षित, स्वतंत्र और बराबरी का भागीदार महसूस करते हैं। लोकतंत्र के मूल । खास मौकों पर खास संकल्प लेने का रिवाज है। भारत के लिए 15 अगस्त से अधिक विशेष अवसर नहीं हो सकता, जब वह अपने भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला ले और इसके केंद्र में युवा हों। उनकी मांग, जवाबदेही और पारदर्शिता लोकतंत्र के मूल में हैं। विकसित भारत के साथ लक्ष्य यह भी हो कि हर सपने को फलने-फूलने का मौका मिलेगा, अवसर समान होंगे और आवाज सबकी बराबर।