AI पर भी रौब

नवभारतटाइम्स.कॉम
ai also subject to authority will artificial intelligence accept the influence of position like humans
दिलीप लाल

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) को हम अक्सर निष्पक्ष और तर्क पर आधारित तकनीक मानते हैं। लेकिन, इसके बढ़ते दायरे को देखकर प्रश्न उठता है, क्या यह भी एक दिन इंसानों की तरह सामाजिक हैसियत और पद के प्रभाव में आ जाएगी? एक हालिया अध्ययन ने टेक्नॉलजी के इस पहलू पर से रोचक अंदाज में पर्दा उठाया है। University of North Carolina के शोधकर्ताओं ने पाया कि जब AI एजेंट्स को बॉस और जूनियर स्टाफ, प्रिंसिपल और टीचर या मैनेजर और सहयोगी कर्मचारी जैसी भूमिकाएं दी गईं, तो उनके बातचीत करने के तरीके में अंतर दिखाई दिया। अध्ययन में बड़े भाषा मॉडल यानी LLM से लैस AI एजेंट्स की जोड़ियां बनाई गईं। एक एजेंट को ऊंचा दर्जा दिया गया, जबकि दूसरे को उससे नीचे की भूमिका। बातचीत के कई दौर में यह सामने आया कि निचले दर्जे वाले AI एजेंट ऊंचे दर्जे वाले एजेंट की बात मानने को तैयार थे। शोधकर्ताओं ने बातचीत में ‘अथॉरिटी बायस’ और ‘हार्मफुल कंप्लायंस’ जैसे व्यवहार पाए। यानी ऊंचे पद वाले एजेंट की बात को जरूरत से ज्यादा महत्व देना और उसके अनुचित आदेश को मान लेना। सवाल अब केवल यह नहीं है कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस कितनी बुद्धिमान है, बल्कि यह भी है कि वह किसकी बात कितना मानती है और क्यों।