Study On Effects And Prevention Of Drug Abuse In Higher Education Institutions Ugc Releases Model Curriculum
उच्च शिक्षण संस्थानों में नशे के प्रभाव और बचाव के बारे में बताएंगे
नवभारतटाइम्स.कॉम•
n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अब छात्रों को नशे की लत, उसके कारण, प्रभाव और बचाव के वैज्ञानिक पहलुओं की पढ़ाई करवाई जाएगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम और प्रबंधन पर मॉडल पाठ्यक्रम का ड्राफ्ट जारी किया है और इस पर सुझाव भी मांगे हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त को पूरे देश में ‘नशा मुक्त युवा- विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत की। इस अभियान से अब शिक्षण संस्थाओं को भी जोड़ा जा रहा है। यूजीसी का कहना है कि नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के तहत पाठ्यक्रमों में भी इसके दुष्प्रभावों को शामिल किया जा रहा है। दरअसल, शिक्षा मंत्रालय ने भी निर्देश दिए थे कि नशे की समस्या, उसकी रोकथाम और प्रबंधन को सभी विषयों के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए, ताकि कैंपस नशामुक्त, सुरक्षित और स्वस्थ बन सकें।दो क्रेडिट का होगा कोर्स : यूजीसी ने ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के विद्यार्थियों के लिए ‘सब्स्टेंस एब्यूज: प्रिवेंशन ऐंड मैनेजमेंट’ नाम से दो क्रेडिट का मॉडल पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसके मसौदे को सार्वजनिक करते हुए आयोग ने शिक्षकों, विशेषज्ञों, छात्रों और अन्य स्टॉक होल्डर्स से 15 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं। पाठ्यक्रम की सबसे खास बात ‘साइंस ऑफ एडिक्शन’ यानी नशे के विज्ञान पर आधारित यूनिट है। इसमें विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि नशे की लत दिमाग पर किस तरह असर डालती है, डोपामिन और अन्य न्यूरोट्रांसमीटर की क्या भूमिका होती है, लत कैसे विकसित होती है और बार बार नशे की ओर लौटने की प्रवृत्ति क्यों बनती है। इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य, तनाव, अवसाद, पारिवारिक माहौल, सोशल मीडिया और साथियों के दबाव जैसे जोखिम कारकों की भी पढ़ाई होगी।