लाठी जवाब नहीं

नवभारतटाइम्स.कॉम
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट के बाद पूरे देश में एक बदलाव देखा जा रहा है। नई पीढ़ी अपने अधिकारों, खासकर एजुकेशन सिस्टम में बेहतरी के लिए सड़कों पर उतर रही है। Gen Z के साथ इसमें जेन अल्फा भी है। ये विरोध-प्रदर्शन व्यवस्था की खामियों को तो उजागर करते हैं, लेकिन यह भी दर्शाते हैं कि नई पीढ़ी जागरूक है और उसे पता है कि सरकार से सवाल पूछना उसका अपना हक है। ऐसे में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादती को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश बेहद अहम हो जाते हैं। इससे जनता के अधिकारों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

समिति करेगी जांच । शीर्ष अदालत ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान पुलिस के अत्यधिक बल प्रयोग की जांच के लिए एक हाईपावर कमिटी गठित करने का निर्देश दिया है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इससे इनकार किया है। वहीं, बिहार सरकार ने माना है कि एक घटना में एके-47 का इस्तेमाल किया गया, पर कोई घायल नहीं हुआ।
संवैधानिक अधिकार । दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में जो पॉइंट्स बताए हैं, उसमें यह बात महत्वपूर्ण है कि प्रदर्शन में आपराधिक रेकॉर्ड वाले भी घुस आए थे। इसके बावजूद ज्यादतियों के आरोपों की जांच जरूरी है, क्योंकि यह आम लोगों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मामला है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को बोलने और अपनी बात रखने की आजादी देता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले कई फैसलों में साफ किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का जरूरी हिस्सा हैं। जनता में सरकार की नीतियों, उसके कामकाज या किसी और वजह से असंतोष है, तो वह अपनी बात विरोध-प्रदर्शनों के माध्यम से रख सकती है।

कानून का दायरा । हालांकि ये अधिकार असीमित नहीं और सार्वजनिक व्यवस्था व सुरक्षा के मद्देनजर इन पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन उसका भी स्पष्ट कारण और तरीका होना चाहिए। यदि कानून-व्यवस्था का कोई मसला है, तो समाधान भी कानून के दायरे में ही होना चाहिए। प्रशासन की जिम्मेदारी किसी आंदोलन-प्रदर्शन में अड़चन डालना नहीं, उसे व्यवस्थित बनाना है।

असहमति भी जरूरी । महत्वपूर्ण है कि समिति महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने के आरोपों की भी जांच करेगी। यह मामला महिला सम्मान और गरिमा से जुड़ा हुआ है। प्रदर्शन के दौरान आए कुछ विडियो विचलित करने वाले हैं, और उनकी तह तक जाना जरूरी है। कुल मिलाकर, इस जांच को सिर्फ इस मामले में पुलिस की भूमिका तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इसका असर आगे भी पड़ेगा। नई पीढ़ी के सवालों का जवाब संवाद है, लाठी नहीं।