78 Thousand Crores Lying Unclaimed In Banks Your Capital Your Right Know How To Get Your Due
किसके लिए कमा रहे
नवभारतटाइम्स.कॉम•
बैंकों में बड़ी मात्रा में जमा राशि बरसों तक बिना दावे के पड़ी रहती है। पिछले दिसंबर तक 78 हजार करोड़ रुपये यूं ही पड़े थे। जो लोग गुजर जाते हैं, उनके रुपये हासिल करने के लिए उत्तराधिकारी भटकते रहते हैं। बैंकों में यह समस्या कम हो, इसके लिए UDGAM पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल पर अप्रैल तक 20 लाख यूजर्स सर्च कर चुके हैं। सरकार सही जगह रकम पहुंचाने के लिए 'आपकी पूंजी आपका अधिकार' अभियान चला रही है। लेकिन, बैंकिंग सेक्टर में इसे जरूरी विषय नहीं समझा जा रहा।
दशकों से बैंक खातों में एक नॉमिनी का प्रावधान था। कई मामलों में एकमात्र नॉमिनी की मृत्यु हो जाने के बाद बहुत परेशानी होती है। सरकार ने पिछले साल नवंबर से चार व्यक्तियों को नॉमिनेट करने की सुविधा दे दी थी। इसे दो तरीकों से अमल में लाया जा सकता है। पहला है Successive, जिसमें नॉमिनी को प्राथमिकता के क्रम रखा जा सकता है। यदि पहला नॉमिनी दावा करने की स्थिति में नहीं है, तो अधिकार खुद ब खुद अगले को मिल जाता है। एक समय में केवल एक व्यक्ति ही प्रभावी नॉमिनी होता है। इसे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सरल उत्तराधिकार व्यवस्था के रूप में देखा जा सकता है। दूसरा तरीका है Simultaneous, जिसमें कई लोगों को अनुपात में एक साथ हिस्सा दिया जा सकता है। एक बड़े प्राइवेट बैंक में जब इस बारे में तफ्तीश की गई, तब पाया कि वहां के अधिकारी भी इससे अनभिज्ञ हैं। उन्हें बताया गया कि Successive तरीके से भरने के लिए उनके बैंक में ऑनलाइन सुविधा नहीं है। अधिकारी ने कहा कि आप इस बारे में बात करने वाले पहले ग्राहक हैं। मुझे इसकी स्टडी करनी होगी। दिलचस्प बात यह है कि देश के सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंकों में से एक ने यह सुविधा काफी पहले ऑनलाइन ही लागू कर दी थी। सरकार को देखना होगा कि सभी बैंक Successive नॉमिनेशन को जल्द से जल्द ऑनलाइन लागू करें। बिना दावे की रकम से निपटने के लिए एक तरीका बेहद कारगर हो सकता है। जहां भी संभव हो, नॉमिनी की KYC जांच खाताधारक के जीते जी हो जाए। निश्चित रूप से नॉमिनी और उत्तराधिकारी में फर्क हो सकता है। लेकिन, परिवारों में नॉमिनी और उत्तराधिकारी अक्सर पत्नी ही होती है। खाताधारक की सहमति से नॉमिनी को भी अपडेट करना चाहिए। डेथ क्लेम में नॉमिनी से कम से कम तीन बार संपर्क का प्रयास होना चाहिए। इसे NPS, एम्प्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड और म्यूचुअल फंड जैसी जगहों पर भी लागू होना चाहिए।