युगांडा के एक वन्यजीव अभयारण्य में दो युवा चिम्पैंजी छलांग लगा रहे थे। उन पर नजर रख रहे शोधकर्ताओं को एक दृश्य ने हैरान कर दिया। दोनों चिम्पैंजी पास बैठे एक रेड-टेल्ड बंदर के करीब पहुंचे। उन्होंने बंदर की पूंछ को प्यार से सहलाना शुरू कर दिया। आम तौर पर चिम्पैंजी दूसरी प्रजाति के बंदरों के प्रति आक्रामक होते हैं। हाल ही में Primates जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि मनुष्य ही अकेली ऐसी प्रजाति नहीं है, जो दूसरे जीवों की देखभाल करती है। पश्चिमी कैरोलाइना यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक और पशु विशेषज्ञों का कहना है कि पालतू जानवर रखने के कारण भी अलग-अलग हैं- साथ की जरूरत, सामाजिक जुड़ाव, कुछ नया पाने की इच्छा और सामाजिक प्रतिष्ठा। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि मनुष्यों ने सबसे पहले ऐसे जानवरों को अपने साथ रखा होगा जो शिकार, सुरक्षा या दूसरे कामों में उपयोगी थे। दूसरी संभावना यह है कि मनुष्य के भीतर स्वाभाविक रूप से दूसरे जीवों की देखभाल करने और उनसे भावनात्मक जुड़ाव बनाने की प्रवृत्ति रही हो। पालतू जानवर रखने का सबसे पुराना पुरातात्विक प्रमाण लगभग 14,000 वर्ष पुरानी जर्मनी की कब्र से मिलता है। इसमें पुरुष और महिला को उनके कुत्ते के साथ दफनाया गया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि जानवरों के साथ ऐसा रिश्ता इससे भी बहुत पहले शुरू हो चुका होगा।