After Fatty Liver In Cyber City Kidneys Are Also Becoming Fatty Experts Concerned
साइबर सिटी में लिवर के बाद अब लोगों की किडनी भी फैटी
नवभारतटाइम्स.कॉम•
n दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव
फैटी लिवर के बढ़ते मामलों के बीच अब किडनी में अतिरिक्त फैट जमा होने पर भी विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। किडनी के आसपास या उसके टिश्यू में फैट के जमाव को फैटी किडनी या रेनल स्टीटोसिस कहा जाता है। इसे अभी फैटी लिवर की तरह स्वतंत्र बीमारी नहीं माना जाता, लेकिन इसका संबंध मोटापा, डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक गड़बड़ी से है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए वजन, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखना किडनी की सेहत के लिए जरूरी है। मणिपाल अस्पताल गुड़गांव की सीनियर कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट एवं रीनल ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉ. नेहा सिंह के अनुसार, फैटी किडनी की समस्या अभी नई-नई पहचानी गई है। इसकी कोई तय परिभाषा नहीं है। किडनी के अंदर या आसपास जमा फैट को CT और MRI जैसी इमेजिंग जांच में देखा जा सकता है। मोटापा सिर्फ लिवर नहीं, किडनी के लिए भी खतरा: मैक्स अस्पताल गुड़गांव के नेफ्रोलॉजी एंड रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. विशाल सक्सेना के अनुसार, फैटी किडनी को अभी फैटी लिवर की तरह स्थापित बीमारी नहीं माना जाता लेकिन मोटापा, पेट की चर्बी, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी पर गंभीर असर डाल सकते हैं।
युवाओं में बढ़ रहा खतरा: कम उम्र में बढ़ता वजन और डायबिटीज अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, युवाओं में फैटी किडनी का अलग से कोई प्रतिशत अभी मौजूद नहीं है, लेकिन बढ़ती मेटाबॉलिक समस्याएं किडनी के स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण हैं।