एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा को अपने खिलाफ पर्सनल इनसॉल्वेंसी के मामले में 6.5 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। बैंकों और दूसरे वित्तीय संस्थानों ने इस मामले में 22006.57 करोड़ रुपये की वसूली का मुकदमा किया था। चंद्रा ने जो रीपेमेंट प्लान दिया था, उस पर लेनदारों ने वोट देकर फैसला किया था। उस फैसले को नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल ( NCLT ) ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत सही करार दिया। इस तरह हर 100 रुपये के दावे के मुकाबले केवल 3 पैसे के बराबर की रिकवरी होगी।इस प्लान पर LIC हाउसिंग फाइनैंस की अगुवाई में कुछ लेनदारों ने ऐतराज जताया था, लेकिन उनका पलड़ा हल्का रहा। वोटिंग का 80.8% से अधिक अधिकार रखने वाले दूसरे लेनदारों ने इसका समर्थन किया था। यह मामला अब बहुमत की राय के हिसाब से ओरिजिनल डिवीजन बेंच के पास औपचारिक आदेश के लिए भेजा जाएगा।
मामला क्या है? : विवेक इंफ्राकॉन ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस (अब इसका नाम सम्मान कैपिटल है) से 170 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। चंद्रा ने इसमें पर्सनल गारंटी दी थी। पैसा वापस नहीं मिलने पर इंडियाबुल्स ने चंद्रा के खिलाफ कदम उठाया। साल 2022 में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत NCLT में शिकायत की। इसमें दूसरे लेनदार भी जुड़ते चले गए और पूरा दावा करीब 22 हजार करोड़ रुपये का बन गया। 2024 में अपील मंजूर की गई थी।
क्या सवाल उठे? : LIC हाउसिंग फाइनैंस ने 1322.39 करोड़ रुपये का दावा किया था। रीपेमेंट प्लान के हिसाब से उसे 38.09 लाख रुपये मिलने वाले हैं। उसने और बाकी लेनदारों ने ऐसी कम रिकवरी पर ऐतराज जताते हुए कहा था कि यह कानून के हिसाब से सही नहीं है।
NCLT ने क्या कहा? : ऐसे मुद्दों पर NCLT बेंच के दो सदस्यों की राय अलग-अलग रही, जिसके बाद NCLT प्रेसिडेंट ने तीसरे मेंबर के रूप में ज्यूडिशियल मेंबर नीलेश शर्मा की नियुक्ति की थी। शर्मा ने रीपेमेंट प्लान को मंजूरी देते हुए यह ऐतराज खारिज कर दिया कि रिकवरी बेहद कम होने वाली है और कानूनी रूप से सही नहीं है।
पूरा कर्ज डूब जाएगा? : NCLT ने कहा कि रीपेमेंट प्लान मंजूर होने पर चंद्रा की इनसॉल्वेंसी खत्म होने के साथ प्लान पर ऐतराज करने वालों के पास अपना कर्ज सीधे मूल कर्जदारों से रिकवर करने का बेहतर चांस रहेगा। इसका मतलब यह है कि 6.5 करोड़ रुपये की रिकवरी पर्सनल गारंटर के रूप में केवल चंद्रा के रीपेमेंट प्लान से जुड़ी है।
कम रिकवरी क्यों मंजूर की? : IBC की वैधानिक प्रक्रिया के तहत पर्सनल गारंटर रिजॉल्यूशन प्रफेशनल के साथ मिलकर रीपेमेंट प्लान बनाता है। इस पर कर्ज देने वाले संस्थान वोटिंग से फैसला करते हैं। इसके बाद NCLT तय करता है कि IBC के दायरे में सब कुछ सही से हुआ है या नहीं। NCLT यह फैसला नहीं करता कि कितनी रिकवरी होगी।
चंद्रा ने क्या कहा? : चंद्रा के ऑफिस की ओर से गुरुवार को जारी बयान में कहा गया कि चंद्रा ने किसी भी लेंडर से कोई पैसा उधार नहीं लिया था और वह इस मामले में केवल पर्सनल गारंटर थे। डॉ चंद्रा ने संसद में 2016 में अपनी संपत्ति 39.08 करोड़ रुपये बताई थी। ऐसे में कोई बैंक 2017 में उनकी संपत्ति 45888 करोड़ रुपये कैसे दर्ज कर सकता है? 2024 में 25 करोड़ रुपये के एक घर सहित उनकी संपत्ति 31.79 करोड़ रुपये थी और इसी के हिसाब से रीपेमेंट प्लान दिया गया कि वह 6.5 करोड़ रुपये चुका सकते हैं।'

