Patriotic Satyamurthy Sagar The Freedom Fighter Who Rescued Madras From Water Crisis
राष्ट्रभक्त सत्यमूर्ति सागर
नवभारतटाइम्स.कॉम•
सुंदर शास्त्री सत्यमूर्ति स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ अद्भुत साहस, ओजस्वी वाणी और अटूट राष्ट्रभक्ति के प्रतीक थे। उन्होंने बंगाल विभाजन के विरोध, रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग नरसंहार, साइमन कमीशन, वैकोम सत्याग्रह, नमक सत्याग्रह और स्वदेशी आंदोलन में भाग लिया। 1930 में मद्रास के पार्थसारथी मंदिर पर तिरंगा फहराने के प्रयास में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। कहा जाता है कि 1931 से 1942 के बीच वह चार बार जेल गए। 1937 में मद्रास विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के सूत्रधारों में वह प्रमुख थे। 1939 में मद्रास का महापौर बनने पर उन्होंने भीषण जल संकट से राहत दिलाने के लिए पूंडी जलाशय योजना को साकार कराया, जिसे आज सत्यमूर्ति सागर के नाम से जाना जाता है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें फिर गिरफ्तार कर अमरावती जेल भेजा गया। लगातार कारावास और अमानवीय यातनाओं ने उनके स्वास्थ्य को बुरी तरह तोड़ दिया। रीढ़ की गंभीर चोट और अस्वस्थता के कारण 28 मार्च 1943 को मद्रास के अस्पताल में उनका निधन हो गया। राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले इस महान जननायक को देश सदा स्मरण करेगा।