खुले नाले में डूबने से इंजीनियर की मौतयह कोई चूक नहीं, 'सरकारी हत्या' है!

नवभारतटाइम्स.कॉम
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n NBT रिपोर्ट, नोएडा/ग्रेटर नोएडा

मॉनसून की लगातार बारिश ने दिल्ली-एनसीआर के 'शो-विंडो' कहे जाने वाले नोएडा और ग्रेटर नोएडा की नागरिक व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। चोक पड़ा ड्रेनेज सिस्टम, जर्जर बुनियादी ढांचा और प्रशासनिक उदासीनता अब आम जनता के लिए जानलेवा साबित हो रही है। नोएडा के सेक्टर-58 में जहां एक खुला नाला 27 वर्षीय इंजीनियर के लिए 'डेथ-ट्रैप' बन गया, वहीं शुक्रवार को दो और खौफनाक हादसे सामने आए। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा-1 में ड्रेनेज लाइन लीक होने से अचानक सड़क धंस गई और बच्चों से भरी एक स्कूल वैन गड्ढे में फंस गई। उधर, नोएडा के सेक्टर-12 में प्राधिकरण के खाली प्लॉट की एक विशाल दीवार ढह गई, जिसकी चपेट में आकर कई गाड़ियां मलबे में तब्दील हो गईं।
फोन नहीं उठाते अफसर, सुध लेने वाला कोई नहीं : ग्रेटर नोएडा के रिहायशी सेक्टरों की स्थिति बेहद बदतर हो चुकी है। सेक्टर डेल्टा-2, बीटा-2 और पी-3 सहित कई इलाकों में मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी गलियों तक में घुटनों तक दूषित पानी भरा हुआ है, जिससे बदबू फैलने लगी है और महामारी का खतरा बढ़ गया है। सेक्टर डेल्टा-2 के आरडब्ल्यूए सचिव आलोक नागर ने बताया कि बारिश के बाद पूरे सेक्टर की व्यवस्था चरमरा गई है। अधिकारियों को कई बार फोन किया गया, लेकिन कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची। जलभराव के कारण लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। सेक्टर बीटा-2 के स्थानीय निवासी सत्येंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि मॉनसून से पहले नालों की सफाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई, जिसका खामियाजा आज जनता भुगत रही है।