India britain Ceta Implemented New Markets Open For Exporters Consumers To Get Double Benefit
दोनों के लिए मौक़े
नवभारतटाइम्स.कॉम•
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) बुधवार से लागू हो गया। अब भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटेन के बाजार में अपने प्रॉडक्ट्स पहुंचाना आसान होगा। करीब 99% निर्यात ड्यूटी फ्री होने से भारतीय उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे। वहीं, ब्रिटेन को भी भारत का विशाल बाजार मिलेगा। भारतीय उपभोक्ताओं तक कई ब्रिटिश उत्पाद पहले से कम कीमत पर पहुंचेंगे।
ग्लोबल चुनौतियां । करीब एक साल पहले दोनों देशों ने जब एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे, तब ग्लोबल ट्रेड सीन डॉनल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी की वजह से अस्थिर और चुनौतीपूर्ण था। आज भी हालात मुश्किल हैं। पश्चिम एशिया संकट ने जिस तरह से सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, उसके बाद सभी देश नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश में हैं। वहीं, अदालती दखल के बावजूद ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन अब भी टैरिफ पर अटका हुआ है। अब रूस से तेल खरीदने वालों पर 100% टैरिफ लगाने का प्लान है।दोहरा फायदा । भारत और ब्रिटेन, दोनों के लिए ही अमेरिका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों को ही टैरिफ की वजह से बड़ी अनिश्चितता का सामना करना पड़ा है। CETA इस माहौल में स्थिरता ला सकता है। किसी विकसित अर्थव्यवस्था के साथ हाल के बरसों में यह पहला व्यापक समझौता है। ब्रिटेन विकसित मार्केट ही नहीं, गुणवत्ता, सुरक्षा और दूसरे मानकों के लिहाज से भी काफी आगे है। भारतीय निर्यातक उस मानक पर खरे उतरते हैं, तो दूसरी जगहों पर भी अवसर खुल सकते हैं।
बेशुमार अवसर । 2025-26 में दोनों के बीच 25.12 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। तब भारत ने 13.44 अरब का निर्यात किया। ब्रिटेन के कुल आयात बिल, 949 अरब डॉलर के सामने यह आंकड़ा बहुत ही छोटा है। ड्यूटी फ्री होने से जब भारतीय उत्पाद वहां सस्ते होंगे, तो उम्मीद है कि आंकड़ा भी बढ़ेगा।
रोजगार बढ़ेगा । टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर और दूसरे लेबर इन्सेंटिव सेक्टर के लिए यह डील बहुत मायने रखती है। इन क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों को चीन, बांग्लादेश और वियतनाम से कड़ी टक्कर मिल रही है। लेकिन, अब बढ़त हासिल करने का अवसर मिलेगा। इससे देश के भीतर रोजगार पैदा करने में भी मदद मिल सकती है। ध्यान देने वाली बात है कि इतने विस्तृत समझौते के बावजूद भारत ने कुछ क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है। अभी जिन समझौतों पर बात चल रही है, उसमें भी इसका ख्याल रखा जाना चाहिए।