SIR अभियान की अवधि बढ़ी, स्कूलों में पढ़ाई होगी प्रभावित

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sir campaign extended crisis deepens in government schools education teachers concerned
n NBT न्यूज, गुड़गांव

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की अवधि बढ़ने से शिक्षकों के साथ सरकारी स्कूलों के छात्रों की समस्याएं भी बढ़ गई हैं। बीएलओ ड्यूटी के चलते स्कूलों में शिक्षक नियमित क्लास नहीं ले पा रहे हैं। इसका असर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई पर दिखने लगा है। जिले के कई सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ के रूप में लगी हुई है। ऐसे में स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो गई है। कई स्कूलों में आधे से अधिक शिक्षक चुनाव संबंधी कार्यों में बिजी होने के चलते मौजूद सीमित स्टाफ का कार्यभार काफी अधिक बढ़ गया है। एक शिक्षक कई कक्षाओं में पढ़ाने को मजबूर है। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
शिक्षकों के अनुसार एसआईआर अभियान की अवधि बढ़ने के कारण अब उन्हें पहले से अधिक समय चुनावी कार्यों में देना पड़ रहा है। मतदाता सूची के वेरिफिकेशन, घर-घर जाकर जानकारी जुटाने और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों के चलते वे नियमित स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। सबसे अधिक असर प्राइमरी व सीनियर सेकेंडरी स्तर की कक्षाओं पर पड़ रहा है, जहां बच्चों को शिक्षक से निरंतर मार्गदर्शन की जरूरत होती है।

शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाए: शिक्षक संगठनों ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाए। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है लेकिन शिक्षा उससे कम महत्वपूर्ण नहीं है। यदि बीएलओ ड्यूटी के लिए वैकल्पिक कर्मचारियों की व्यवस्था की जाए तो पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रह सकती है।

घट सकती है सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या : शिक्षकों का कहना है कि पिछले दो से तीन महीने से वह गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझे हुए हैं। गर्मी की छुट्टी से पहले जनगणना में ड्यूटी दे रहे थे और अब एसआईआर की ड्यूटी कर रहे हैं। परफॉर्मेंस बेहतर नहीं मिलने से पैरंट्स अपने बच्चों के नाम स्कूल से कटवा भी सकते हैं। ऐसे में शिक्षक दोहरी चुनौती में फंसे हुए हैं।

शिक्षक संगठनों की नज़र सरकार के फैसले पर टिकी :राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान अशोक कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और निपुण भारत मिशन जैसे कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए कक्षा में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति जरूरी है। ऐसे में एसआईआर अभियान और शैक्षणिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बन गया है। संगठनों की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है कि पढ़ाई को प्रभावित होने से बचाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।