‘नफरत नहीं, मोहब्बत से मजबूत होगा देश’

नवभारतटाइम्स.कॉम
country will be stronger with love not hate maulana arshad madani
n NBT न्यूज, लखनऊ : हिंदू-मुस्लिम एकता सम्मेलन में जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने सामाजिक सौहार्द , कानून के राज और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।

शनिवार को अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी , सामाजिक नफरत, कुरआन, अजान, पेपर लीक और ज्ञानवापी जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती नफरत को केवल प्रेम और संवाद से ही कम किया जा सकता है।
जौहर यूनिवर्सिटी: कानून चले, बुलडोज़र नहीं

मदनी ने रामपुर की मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर हो रही कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि यदि किसी निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अदालत का फैसला आने से पहले बुलडोजर चलाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हजारों छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखा जाना चाहिए। मदनी ने कहा कि आजम खां एक राजनीतिक व्यक्ति हैं लेकिन मौलाना मोहम्मद अली जौहर का देश की आजादी में बड़ा योगदान रहा है और उनके नाम पर बनी यूनिवर्सिटी की पहचान बनी रहनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि कानून अपना काम करे, लेकिन ध्वस्तीकरण पहला विकल्प नहीं होना चाहिए।

मोहब्बत, इंसानियत और संविधान पर दिया जोर

मदनी ने कहा कि देश में बढ़ती नफरत समाज और राष्ट्र दोनों के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने लोगों से इस्लाम को अफवाहों के बजाय कुरान पढ़कर समझने की अपील करते हुए कहा कि कुरान कहीं भी कत्ल या नफरत की शिक्षा नहीं देता, बल्कि इंसानियत और मोहब्बत का संदेश देता है। अजान और मस्जिद को लेकर उन्होंने कहा कि विवाद करने के बजाय उनके वास्तविक अर्थ को समझने की जरूरत है। पेपर लीक पर उन्होंने लाखों युवाओं के भविष्य की चिंता जताई, जबकि ज्ञानवापी विवाद को अदालत के फैसले पर छोड़ने की बात कही। सम्मेलन में मुख्य अतिथि संकट मोचन मंदिर के महंत डॉ. विशंभर नाथ मिश्र और वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह समेत विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने भी सामाजिक सौहार्द, संविधान और अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने पर जोर दिया। सम्मेलन में बौद्ध भिक्षु गुरु शांति रजत, पादरी जितेंद्र सिंह, सिख प्रतिनिधि राजेंद्र सिंह और फजलुर्रहमान कासमी ने भी सामाजिक सौहार्द और संवाद को मजबूत करने पर जोर दिया।