कैसा असर?

नवभारतटाइम्स.कॉम
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Kepler की रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों के ऐलान के बाद यांबू से भारत और चीन के लिए रवाना हुए दो जहाजों को रास्ता बदलना पड़ा है। बाब अल मंदेब से जहाजों की रोजाना की आवाजाही 34% घट गई है।

रितोलिया ने कहा, 'सऊदी अरब ने होरमुज स्ट्रेट से तेल भेजना काफी कम कर दिया था और यांबू से उसका एक्सपोर्ट जून में बढ़कर करीब 42 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया था। यह परंपरागत रूप से रास तनूरा पोर्ट से होने वाले निर्यात के करीब 64% के बराबर है। इससे होरमुज स्ट्रेट पर निर्भरता घटी, लेकिन रेड सी और बाब अल मंदेब कॉरिडोर ज्यादा अहम हो गया। अभी भारत पर सीधा असर नहीं है, लेकिन इस मोर्चे पर तनाव बढ़ने और आपूर्ति बाधित होने से खासतौर से भारत, दक्षिण कोरिया और जापान पर असर पड़ेगा, जो इस क्रूड पर काफी निर्भर हैं।'