कच्चे तेल की सप्लाई पर हूती चरमपंथियों का साया

Contributed byAkhilesh.Singh1,नई दिल्ली|नवभारतटाइम्स.कॉम
कच्चे तेल की सप्लाई पर हूती चरमपंथियों का साया
नई दिल्ली : होरमुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और अमेरिका में युद्ध के बीच कच्चे तेल की सप्लाई में एक और मोर्चे पर दिक्कत बढ़ सकती है। ईरान के समर्थन में यमन के हूती चरमपंथियों ने सऊदी अरब के जहाजों के लिए बाब अल मंदेब में नाकाबंदी का ऐलान कर दिया है। इससे सऊदी अरब से दूसरे देशों के साथ भारत को भी कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। यह इस मायने में अहम है कि सऊदी अरब युद्ध शुरू होने के बाद भारत के लिए रूस और UAE के बाद क्रूड ऑयल का तीसरा बड़ा स्रोत रहा है। विशेषज्ञ रूसी सप्लाई प्रभावित होने का डर भी जता रहे हैं। इस बीच बुधवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 3% ज्यादा चढ़कर 94 डॉलर/बैरल के करीब पहुंच गया।

क्यों है अहम? : यह हॉर्न ऑफ अफ्रीका यानी सोमालियन पेनिन्सुला और अरेबियन पेनिन्सुला के बीच है। इसके एक ओर इरिट्रिया और जिबूती हैं और दूसरी ओर यमन। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने का प्रमुख जरिया है। अभी तक बाब अल मंदेब से 60 से 70 लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन ढोया जा रहा था। इसमें से लगभग आधा क्रूड सऊदी अरब अपने यांबू बंदरगाह से भेज रहा था। बाकी में से अधिकांश हिस्सा रूस से भारत आने वाले तेल का है। इसी रास्ते से कुछ तेल चीन भी जा रहा था।
अगर पूरी नाकाबंदी हो गई, तो सऊदी अरब से जहाजों को स्वेज नहर का रास्ता पकड़ना पड़ेगा। ग्लोबल रियल टाइम डेटा प्रोवाइडर Kpler के लीड एनालिस्ट सुमित रितोलिया ने कहा, 'एशियाई तेल रिफाइनरी कंपनियों के लिए लाल सागर भी स्ट्रेट ऑफ होरमुज जैसा अहम हो गया है। वहां स्थिति बिगड़ने पर कच्चे तेल की उपलब्धता, ढुलाई लागत, क्षेत्रीय आपूर्ति और रिफाइनरीज के कामकाज पर असर पड़ेगा।'

कच्चे तेल की सप्लाई पर हूती चरमपंथियों का साया



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