होर्मुज को लेकर बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय देशों की साझा पहल उम्मीद की नई किरण है। अगर समुद्री मार्ग का प्रबंधन सहयोग और सहमति से होता है तो यह सिर्फ व्यापार ही नहीं, वैश्विक स्थिरता के लिए भी सकारात्मक संकेत होगा। युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों, अर्थव्यवस्था और मानवता को उठाना पड़ता है। दुनिया पहले ही संघर्षों की भारी कीमत चुका रही है। ऐसे में संवाद, कूटनीति और साझेदारी ही स्थायी समाधान का रास्ता है। मतभेद कितने भी गहरे हों, उनका अंत बातचीत से ही संभव है। मानवता के हित में यही समय की मांग है कि टकराव नहीं, बल्कि शांति को सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया जाए।