आरक्षण समाप्त हो

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end reservation social justice or division demand for reconsideration
आरक्षण व्यवस्था सामाजिक न्याय के उद्देश्य से लागू की गई थी, लेकिन अब इसकी समीक्षा की आवश्यकता महसूस होती है। संविधान निर्माण के समय इसे सीमित अवधि के लिए लागू करने की बात कही गई थी, जबकि आज इसका दायरा लगातार बढ़ रहा है। मेरा मानना है कि इससे समाज में विभाजन , असंतोष और प्रतिभाओं का पलायन बढ़ता है। अब समय आ गया है कि आरक्षण व्यवस्था पर गंभीरता से पुनर्विचार कर समान अवसर आधारित व्यवस्था लागू की जाए, ताकि देश का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।

संदीप आर्य, ईमेल से