Gen Zs Movement In Mumbai Youth Generations Loud Voice On Education System
मुंबई में गूंजी Gen Z की बुलंद आवाज़
नवभारतटाइम्स.कॉम•
मुंबई हमेशा ही आंदोलन की धरती रही है। इस बार भी स्टूडेंट्स से जुड़े मुद्दे पर जब दिल्ली के जंतर-मंतर में आंदोलन तेज हुआ, तो मुंबई में Gen Z ने बड़े जोर-शोर से अपना पैगाम रखा। मुंबई की सड़कों ने केवल ट्रैफिक और भागदौड़ ही नहीं देखी है, बल्कि वे लोकतांत्रिक संघर्षों की भी गवाह रही हैं। इधर हजारों विद्यार्थियों ने अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर आवाज उठाई, तो इस आंदोलन का केंद्र बना मुंबई का ऐतिहासिक शिवाजी पार्क और आजाद मैदान। शिवाजी पार्क महाराष्ट्र के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण मंच रहा है। संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन से लेकर विभिन्न राजनीतिक रैलियों और सामाजिक अभियानों तक इस मैदान ने कई ऐतिहासिक क्षणों को देखा है। हाल के आंदोलन में विद्यार्थियों के हाथों में जो तख्तियां थीं, उनमें परीक्षा प्रणाली, पारदर्शिता और शिक्षा के भविष्य को लेकर जरूरी सवाल थे। सोशल मीडिया के दौर में पले-बढ़े इस युवा वर्ग ने यह साबित किया कि डिजिटल मंचों पर अपनी बात रखने के साथ-साथ वे सड़क पर उतरकर भी अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं।
बदलाव की हवा यहीं से बहती है । मुंबई का इतिहास बताता है कि यहां के आंदोलन केवल विरोध तक सीमित नहीं रहे, बल्कि बदलाव का माध्यम भी बने हैं। 1950 और 1960 के दशक में संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन ने राज्य के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। 1970 और 1980 के दशकों में मजदूर आंदोलनों ने श्रमिक अधिकारों की बहस को नई दिशा दी। हाल के वर्षों में पर्यावरण संरक्षण, आरे जंगल बचाओ अभियान और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर भी मुंबईकरों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई है। यही कारण है कि जब छात्र सड़कों पर उतरे, तो शहर ने उनकी आवाज को गंभीरता से सुना।बाबासाहेब आंबेडकर की कर्मभूमि । मुंबई को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की कर्मभूमि माना जाता है। उन्होंने सामाजिक सुधार के लिए मुंबई को आंदोलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाया था। मुंबई के मिल मजदूरों, कामगारों और वंचित वर्गों के मुद्दों पर बाबासाहेब हमेशा सक्रिय रहे। महाड सत्याग्रह सहित कई आंदोलनों को मजबूती देने की शुरुआत मुंबई से ही की गई।
मुंबईकरों का जोश । मुंबई में रहने वाले लोगों को न्यायप्रिय माना जाता रहा है। मुंबईकर संकट के समय मदद करने में हमेशा आगे रहे हैं। चाहे वह 2005 में 26 जुलाई की बाढ़ हो या कोरोना महामारी का दौर हो, मुंबई के लोग हमेशा लोगों की जान बचाने के लिए आगे आते रहे हैं। मुंबईकरों का यही उत्साह उन्हें तब तक चैन से बैठने नहीं देता, जब तक उन्हें न्याय न मिले। इस बार भी मुंबई में Gen Z ने ऐसा जोश दिखाया, जिसका असर बहुत दिनों तक रहेगा।