ताउम्र रहा हिरोशिमा पर बम गिराने का दुख

नवभारतटाइम्स.कॉम
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साल 1959 में अमेरिका के टेक्सस की एक अदालत में एक खास आरोपी पर लूट के बेहद मामूली केस की सुनवाई चल रही थी। आरोपी था 42 साल का एक शख्स। जब जज ने उससे एक सवाल पूछा, तो जवाब में उसने अपने बीते कई बरसों का लेखा-जोखा कोर्ट के सामने रख दिया। जूरी ने खामोशी से आरोपी की बात सुनी और आखिर में उसे निर्दोष करार दे दिया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसे उसी मनोरोग अस्पताल में वापस भेज देना चाहिए, जहां वह इससे पहले 9 बार रह चुका है। वह आरोपी था क्लॉड इथरली , जिसे दुनिया अब तक हिरोशिमा वॉर हीरो के नाम से जानती थी। हिरोशिमा पर 6 अगस्त 1945 की सुबह परमाणु बम गिराया गया था।

अमेरिकी मिशन का हिस्सा । इथरली न्यूक्लियर बम गिराने वाले अमेरिकी सेना के दस्ते के अहम सदस्य थे। उनका बचाव करने वाले वकील के मुताबिक, वह हिरोशिमा गिल्ट से पीड़ित हो गए थे और चेक बांउस व स्टोर में चोरी जैसे छोटे-मोटे अपराध करने लगे ताकि उन्हें सजा मिल सके। टेक्सस के किसान परिवार से निकले क्लॉड महज 26 साल के थे, जब अमेरिकी मिशन का हिस्सा बने। हमले के लिए सात B-29 फाइटर एयरक्राफ्ट्स का इस्तेमाल हुआ था। इनमें से एक को इथरली चला रहे थे। उन्होंने बम गिराए जाने के एक घंटे पहले हिरोशिमा के आसमान का दौरा किया और मौसम के ठीक होने की रिपोर्ट दी। इसके एक घंटे बाद बम गिराया गया। बम फटने के तुरंत बाद 70 हजार लोग एकाएक मर गए और कुल डेढ़ लाख लोगों ने इस विस्फोट में जान गंवाई।
विनाश के जिम्मेदार । इस अटैक के बाद इथरली का जीवन पूरी तरह डांवाडोल हो गया। इसकी शुरुआत हुई 1947 में, जब वह सेना से अलग हो गए। ऐसा क्यों हुआ? इसे लेकर पब्लिक डोमेन में दो थिअरी हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने सेना में रेगुलर कमिशन के लिए अर्जी दी थी। लेकिन, एक रिसर्च पेपर में कथित चीटिंग करने की वजह से उन्हें सम्मानजनक तरीके से रिटायरमेंट दे दिया गया। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स का यह भी कहना है कि उनकी मानसिक बीमारी उनकी नौकरी में आड़े आ गई। एयरफोर्स छोड़ने के बाद उन्होंने टेक्सस में एक तेल कंपनी के लिए काम किया और पेट्रोल पंप के लिए सेल्स मैनेजर बन गए। लेकिन, उनकी मानसिक हालत लगातार खराब होती रही। वह खुद को हिरोशिमा हमले में हुए विनाश के लिए जिम्मेदार मानने लगे।

कभी चैन नहीं मिला । 1960 में परेड मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में इथरली ने कहा कि वह पिछले 15 बरसों से सो नहीं पाए हैं। इंटरव्यू में उन्होंने बताया, 'मुझे हर जगह आग दिखाई देती है, जैसे कि आग के गोले मेरी ओर बढ़ रहे हैं। इस बीच इमारतें गिरती हैं और आग से झुलसे बच्चे मेरी ओर दौड़ते हैं और मुझसे पूछते हैं कि आपने ऐसा क्यों किया? इतने में मैं घबरा के नींद से उठ जाता हूं।' एक समय ऐसा भी आया, जब उन्होंने खुद की जान लेने की कोशिश की।

गिल्ट या हीन भावना । हालांकि कुछ लोगों ने इथरली की 'गिल्ट' थिअरी को भ्रामक बताया। ऐसे ही एक लेखक और खोजी पत्रकार William Bradford Huie ने अपनी एक किताब 'द हिरोशिमा पायलट' में कई तर्कों के जरिये यह साबित करने का प्रयास किया कि इथरली गिल्ट नहीं, हीन भावना के शिकार थे। खैर, इथरली जीवन के आखिरी क्षण तक भावनाओं की इसी भूल-भुलैया में उलझे रहे। गले के कैंसर से 1978 में उनकी मौत हो गई। उनके भाई के मुताबिक, वह कभी पछतावे से छुटकारा नहीं पा सके।

(NBT)