बाजार रेगुलेटर सेबी ( SEBI ) अपने ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) सिस्टम में बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। इसका मकसद निवेशकों की शिकायतों को ज्यादा तेजी, पारदर्शिता और आसानी से सुलझाना है। सेबी ने इन बदलावों पर आम लोगों और बाजार से जुड़े लोगों से 13 अगस्त तक राय मांगी है।रेगुलेटर ने अपने कंसल्टेशन पेपर में कहा, विवाद सुलझाने (सुलह और मध्यस्थता) का काम अब प्राइवेट संस्थाओं से लेकर सीधे स्टॉक एक्सचेंज , डिपॉजिटरी और मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थाओं (MIIs) को सौंप दिया जाएगा। सेबी का कहना है कि इन संस्थाओं का लिस्टेड कंपनियों और बिचौलियों पर बेहतर कंट्रोल होता है और वे उनसे नियमों का पालन ज्यादा कड़ाई से करवा सकते हैं। और इनमें से ज्यादातर किसी न किसी रूप में MIIs के साथ रजिस्टर्ड होते हैं।
प्रस्ताव के मुताबिक, अब स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन खुद टेक्नॉलजी पर आधारित ऑनलाइन प्लैटफॉर्म चलाएंगे। वे विवाद सुलझाने वाले मध्यस्थों की लिस्ट बनाएंगे और उनकी नियुक्ति का पूरा काम संभालेंगे।
सेबी ने यह भी सुझाव दिया है कि मध्यस्थ की फाइनल नियुक्ति से पहले, दोनों पक्षों (निवेशक और कंपनी) को एक लिस्ट दी जाएगी, जिसमें से वे अपनी पसंद बता सकेंगे। हालांकि, सुलह कराने वालों (conciliators) की नियुक्ति MII द्वारा उनकी पैनल में शामिल सूची से ही की जाती रहेगी।
पुराने सिस्टम की कमियां होंगी दूर
सेबी को बाजार के जानकारों और निवेशकों से फीडबैक मिला है कि मौजूदा सिस्टम में कई दिक्कतें हैं। जैसे—मध्यस्थों को चुनने में देरी होना, उनके पेमेंट में समस्या और फैसलों को लागू करने में आने वाली मुश्किलें। इन कमियों को दूर करने के लिए सेबी पुराने ‘प्री-ODF’ सिस्टम की अच्छी बातों को वापस ला रहा है, जिसमें MIIs का कंट्रोल ज्यादा होता था।
निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए सेबी अपने विवाद सुलझाने के ऑनलाइन सिस्टम में बड़ा फेरबदल करने जा रहा है। अब शिकायतों के निपटारे की मुख्य ज़िम्मेदारी स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरी जैसी संस्थाओं की होगी। सेबी का मानना है कि इससे शिकायतों का निपटारा तेज़ी से होगा और कंपनियों पर नियमों को मानने का दबाव बढ़ेगा। इस पर आम लोग 13 अगस्त तक अपनी राय दे सकते हैं।

