बढ़ता ख़तरा

नवभारतटाइम्स.कॉम
iran america conflict growing threat of full scale war in west asia
अमेरिका और ईरान का संघर्ष अब पश्चिम एशिया के कई देशों में फैल चुका है। जिस तरह दोनों तरफ से नए क्षेत्रों को निशाना बनाया जा रहा, उससे इस टकराव के पूर्ण युद्ध में बदलने का खतरा है। अगर अभी बातचीत शुरू करने के प्रयास नहीं हुए, तो परिणाम भयावह होंगे।

बदलते हालात । अमेरिका के अंतरिम समझौते से बाहर निकलने के बाद से संघर्ष जारी है। हालांकि इस हफ्ते की शुरुआत में खबर आई थी कि डॉनल्ड ट्रंप फिर से कूटनीतिक विकल्पों के बारे में भी विचार कर रहे हैं। लेकिन, सऊदी अरब के अमेरिका के साथ खुलकर आने के बाद परिस्थितियां फिर बदल गईं। दोनों देशों ने इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया को निशाना बनाया। बदले में तेहरान ने जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस पर हमला किया, जिसमें F-35 नष्ट करने का दावा है। कुवैत में एक चीनी कंपनी की इमारत पर भी स्ट्राइक हुई है।
खतरनाक अनिश्चितता । अब सीन यह है कि बातचीत के विकल्प को छोड़कर ट्रंप फिर से 'कड़ा जवाब' देने की बात कह रहे हैं। ईरान के भीतर दर्जनभर जगहों पर बमबारी की गई है। वहीं, दो दिन पहले इजिप्ट में एक टैंकर पर ड्रोन अटैक हुआ। इजिप्ट तक पहली बार ड्रोन पहुंचा है और अभी तक पता नहीं चल सका है कि इस हमले के पीछे कौन था। यही अनिश्चितता पांच महीने से चल रही इस लड़ाई को खतरनाक बनाती है। इस इलाके में हूती, हिजबुल्लाह समेत ईरान के कई प्रॉक्सी मौजूद हैं, जो नहीं चाहते कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच किसी तरह का समझौता हो। इन पर नियंत्रण बेहद मुश्किल है और इनकी भड़काई चिंगारी किसी भी समय भयानक आग बन सकती है।

बढ़ेगी उलझन । इन प्रॉक्सी के अलावा, पश्चिम एशिया के भीतर मौजूद देशों के भी अपने-अपने भू-राजनीतिक समीकरण हैं। जितने ज्यादा देश इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होंगे, लड़ाई और उलझती जाएगी। अस्थिरता का शिकार इराक अभी तक अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा था। उसके यहां भी ईरान समर्थक ताकतें मौजूद हैं, जो उसके काबू के बाहर हैं। लड़ाई का दायरा अगर वहां तक बढ़ता है, तो अमेरिका के लिए चुनौती भी बढ़ जाएगी।

कूटनीति ही रास्ता । दोनों पक्षों को इस स्थिति से बाहर निकलने का रास्ता तलाशना चाहिए और ऐसा केवल कूटनीति से ही संभव है। अगर किसी को लग रहा है कि वह युद्ध को नियंत्रित करते हुए निर्णायक जीत हासिल कर लेगा, तो यह उसकी बहुत बड़ी भूल है। शांति कायम करने के लिए दोनों को अपने रवैये और शर्तों में ढील देनी चाहिए।